नई दिल्ली. सरकारी नौकरियों में राज्य सरकार द्वारा दिए गए आरक्षण पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद जाटों ने आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है. जाट नेताओं ने फैसला किया है कि वो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे. इंडिया न्यूज़ से बातचीत में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हवा सिंह सागवान ने बताया कि बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी. 
 
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के वकील रणधीर सिंह ने बताया कि उनका मुख्य आधार है कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही अंतरिम आदेश दे दिया है. ऐसे में जब तक मामले की सुनवाई लंबित है तब तक अंतरिम रोक को हटाया जाये. साथ ही रणधीर सिंह ने कहा कि इस समय शैक्षिक संस्थानों में दाखिले हो रहे है ऐसे में जाटों को ओबीसी कैटेगरी के तहत ही दाखिला दिया जाये. वही सरकारी नौकरियों में भी  उन्हें ओबीसी कैटेगरी का लाभ मिले.
 
बता दें कि जाट आरक्षण कानून को 29 मार्च को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था. नया कानून जाट और पांच अन्य समुदायों को पिछड़ा वर्ग (सी) श्रेणी के तहत आरक्षण देता है. पांच अन्य समुदायों में जाट सिख, मुस्लिम जाट, बिश्नोई, रोर और त्यागी शामिल हैं.इन्हें सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है.
 
बता दें कि हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा नई बनाई गई पिछड़ा वर्ग :सी: श्रेणी के तहत जाटों और पांच अन्य समुदायों को दिए गए आरक्षण पर रोक लगा दी थी. हाईकोर्ट ने यह आदेश हरियाणा पिछड़ा वर्ग  अधिनियम 2016 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया था.