नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक को लेकर एक और याचिका दाखिल की गई है. तमिलनाडु के पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता बाबर सईद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया है. याचिका में कहा गया है कि पुरुष बिना कोर्ट के अनुमति के गैर संवैधानिक तरीकों से मुस्लिम महिलाओं को तलाक दे रहे हैं. बता दें कि मामले कि सुनवाई संभवत जुलाई में होगी.
 
दर्ज की गई अर्जी में कहा गया है कि ट्रिपल तलाक की वजह से महिलाओं को घर से बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे वो और उनके बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है. इतना ही नहीं तमिलनाडु के काजी पुरुष के ट्रिपल तलाक के जरिए दिए गए तलाक को वाजिब मानते हुए उन्हें सेटिफिकेट जारी कर रहे है. याचिका में कहा गया है कि काजियों के पास कोई भी संवैधानिक अधिकार नहीं है कि वो ट्रिपल तलाक को संवैधानिक करार दें.
 
याचिका में कहा गया है कि ट्रिपल तलाक मूल अधिकारों का हनन है. ये राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करे. साथ ही मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट विशाखा केस की तरह इस मामले में भी कोई दिशानिर्देश तय करें और शरीयत के ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक घोषित करे.
 
पहले भी दायर की गई याचिका
 
इससे पहले आफरीन रहमान ने भी ट्रिपल तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनोती दी थी. दरअसल 25 साल की आफरीन रहमान को एक स्पीड पोस्ट मिला, जिस पर  ‘ट्रिपल तलाक’ लिखा था. आफरीन स्पीड पोस्ट को देख हैरान रह गईं थी. लेकिन महिला ने खुद को मजबूत किया और इस्लाम के ‘ट्रिपल तलाक’ के नियम के खिलाफ ही सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दे डाली. सुप्रीम कोर्ट ने इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा था. साथ मामले को मुख्य मामले के साथ जोड़ दिया था.
 
आफरीन रहमान ने बताया, ‘एक विवाह पोर्टल के जरिये मेरी शादी 2014 में हुई थी. शादी के दो से तीन महीने बाद ही मेरे ससुरालवालों ने दहेज के लिए मुझे मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था’.
 
आफरीन ने ससुरालवालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘बाद में उन्होंने मुझे पीटना भी शुरू कर दिया था. मैं अपने मायके चली आई और अब मुझे स्पीड पोस्ट से तलाक भेजा गया. यह पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है. मैंने इस मामले में हस्तक्षेप के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है’.
 
क्या है ट्रिपल तलाक
 
मुस्लिमों में तलाक-ए-बिदत एक प्रैक्टिस है जिसकी मदद से मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी की माहवारी के दौरान एक से अधिक बार तलाक बोल डिवॉर्स ले सकता है. मुस्लिम पुरुष तलाक शब्द को तीन बार बोलकर कभी भी डिवॉर्स ले सकता है. इस प्रैक्टिस को ‘ट्रिपल तलाक’ कहते हैं.