नई दिल्ली. कोच्ची राजघराने ने अपनी बेशकीमती पारिवारिक विरासत को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है. 16वीं शताब्दी के आखिरी हेडगियर (हाथियों को पहनाये जाना वाला सोने और बेशकीमती आभूषणों से बना मुकुट) को नष्ट होने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है.
 
कोर्ट ने कोचीन देवासवम बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने कोच्ची राजघराने की इस ऐतिहासिक विरासत को नष्ट करने और दूसरा बड़ा हेडगियर बनाने का आदेश दिया था. 
 
बता दें कि कोच्ची के महाराज ने 17 वी शताब्दी के अंत में 15 सोने और बेशकीमती आभूषणों से जड़े मुकुट (हेडगियर) बनवाये थे. लेकिन 1895 और 1914 के बीच इन 15 हेडगियर्स में से 14 को उन्होंने कोचीन और शोरणपुर के बीच रेल लाइन बिछाने के लिए बेच दिया ताकि पैसों का इंतजाम हो सकें.
 
कोचीन देवासवम बोर्ड और श्री पूर्णनाथईशा सेवा संघ कमिटी ने इस सोने के मुकुट को गलाकर नया बनाने की मांग की थी. कमेटी ने बताया था कि ये मुकुट महज 8 किलो सोने से बना हुआ है. जो बड़े हाथियों मंदिर के समारोह में शामिल किये जाते हैं उन्हें ये फिट नहीं बैठता है. इस समारोह के लिए इससे बड़ा 12 किलो सोने का मुकुट बनवाया जाये जो बड़े हाथियों को फिट आ सके.
 
इसके खिलाफ शाही परिवार ने एर्नाकुलम की निचली अदालत में याचिका दाखिल कर इसको नष्ट होने से बचाने की मांग की थी. मामले में सुनवाई के बाद निचली अदालत ने इस मामले में यथास्थिति बरक़रार रखने के निर्देश दिए। जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इस मुकुट को (नष्ट) करने की इजाजत दे दी और कहा कि 25 मई को इसको डिसमेंटल किया जाये.