तेहरान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन के दौरे पर तेहरान पहुंच गए हैं. ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के निमंत्रण पर पीएम मोदी ईरान यात्रा कर रहे हैं. मोदी की यह पहली ईरान यात्रा है. रविवार को तेहरान के एक गुरुद्वारे में मत्था टेकने के साथ ही उन्होंने दौरे की शुरुआत की.
 
पाक चीन को मिलेगा करारा जवाब
इस दौरे के दौरान दोनों देशों में कई अहम डील्स हो सकती हैं. इनमें से सबसे खास चाबहार पोर्ट को लेकर होने वाली डील है. इस डील के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार करना आसान हो जाएगा. चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है. अब भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट पर होने वाला करार दरअसल, पाकिस्तान और चीन को भारत का करारा जवाब ही माना जाएगा.
 
आयतुल्ला अली खामेनेइ से करेंगे मुलाकात
ऊर्जा संपन्न ईरान की अपनी पहली यात्रा से पहले मोदी ने रविवार को कहा कि उनकी इस खाड़ी देश की यात्रा का मकसद प्रतिबंध के बाद उसके साथ संपर्क, व्यापार, निवेश तथा ऊर्जा भागीदारी को मजबूत करना है अपनी यात्रा के दौरान मोदी ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनेइ और राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा तथा रणनीतिक संबंधों पर बातचीत करेंगे.
 
चाबहार पोर्ट भारत के रणनीतिक संबंधों के लिए काफी अहम
चाबहार ओमान की खाड़ी में स्थित है और पाकिस्तान की सीमा से लगा है. इस बंदरगाह को बनाने के भारत के कदम से भारत, पाकिस्तान को चकमा देते हुए अफगानिस्तान के साथ-साथ मध्य एशिया से रणनीतिक संपर्क बहाल कर लेगा. पीएम मोदी के दौरे के समय अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी तेहरान में रहेंगे, ताकि चाबहार बंदरगाह के बारे में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर कर सकें. दरअसल चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है और अब चाबहार पोर्ट को लेकर होने वाली डील से भारत पाक और चीन को करारा जवाब देगा.
 
चाबहार पोर्ट का मुद्दा सबसे अहम
ईरान चाबहार पोर्ट को डेवलप करना चाहता है और भारत इसमें मदद को तैयार है. इसके फर्स्ट फेज के डेवलपमेंट के लिए दोनों देशों मे डील होने जा रही है. इसके अलावा ईरान को ऑयल सेक्टर में भी भारत मदद करने जा रहा है. चाबहार पोर्ट के तैयार हो जाने के बाद भारत और ईरान सीधे ट्रेड कर सकेंगे. भारतीय या ईरानी जहाजों को पाकिस्तान के रूट से नहीं जाना पड़ेगा. रविवार की शाम तेहरान पहुंचने के बाद मोदी ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खमेनी और प्रेसिडेंट रोहानी से मिलेंगे.
 
प्रतिबंध के बाद भी भारत ने नहीं किया था तेल का आयात बंद
बता दें कि भारत ईरान से कच्चा तेल लेने वाले सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है. चीन के बाद भारत ही ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है. ईरान पर प्रतिबंध लगने के दौरान भी भारत ने तेल का आयात बंद नहीं किया था. यह प्रतिबंध इस साल की शुरुआत में हटाया गया है.