नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने पत्रकार पुष्प शर्मा को आरटीआई जवाब में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है. आरटीआई में आरोप लगाया गया था कि आयुष मंत्रालय ने योग दिवस के मौके पर किसी भी मुस्लिम को नौकरी देने से इनकार किया. पुष्प को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
 
क्या था मामला?
बता दें कि पुष्प पर आरोप है कि उन्होंने आरटीआई के साथ संलग्न एक कागजात में गड़बड़ी की थी और बताया था कि सरकार अपनी नीति के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के लोगों को बतौर योग शिक्षक नियुक्त नहीं करती है. मंत्रालय का कहना था कि एक रिपोर्ट को समाज के अलग-अलग समुदायों में भेद पैदा करने के मकसद से छापा गया. दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने पुष्प के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया है.
 
आयुष मंत्रालय ने क्या कहा ?
आयुष मंत्रालय ने कहा था कि पुष्प के द्वारा लिखी गई एक रिपोर्ट को समाज के अलग-अलग समुदायों में भेद पैदा करने के मकसद से छापा गया. दक्षिणी दिल्ली ने पुष्प के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया है. पुष्प शर्मा से 2009 में उनकी गिरफ्तारी को लेकर भी पूछताछ की गई. उनपर आरोप था कि एक पुलिसकर्मी को फर्जाी स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए धमका कर वह रंगदारी वसूलने की कोशिश कर रहे थे.
 
बतौर पत्रकार के आयुष मंत्रालय में लगाई थी RTI
पुष्प शर्मा से 2009 में उनकी गिरफ्तारी को लेकर भी पूछताथ की गई. उनपर आरोप था कि एक पुलिसकर्मी को फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए धमका कर वह रंगदारी वसूलने की कोशिश कर रहे थे. बतौर पत्रकार के मुताबिक उसने आयुष मंत्रालय में आरटीआई लगाई थी कि योग दिवस पर कितने मुस्लिमों को नौकरी दी गई. जिसके जवाब में उन्हे लिखित में मिला था कि सरकार की नीति के कारण मुस्लिम योग शिक्षक नहीं बनाए गए थे. पुलिस पुष्प द्वारा दिए गए कागजातों की सत्यता की जांच कर रही है. इन कागजातों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा.
 
पत्रकार पर लगीं ये धाराएं
पुष्म शर्मा पर आईपीसी की धाराओं 420 (जालसाजी), 469 (किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना), 153a (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है. कोटला मुबारकपुर पुलिस ने धारा 161 के तहत, समाचार पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ जफारुल इस्लाम खान से 11 अप्रैल को पूछताछ की. भारतीय प्रेस परिषद (PCI) ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है.