नई दिल्ली. इन दिनों देश भयंकर सूखे की मार से जूझ रहा है. देश के 10 राज्यों में लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे है. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने भी सूखे से निपटने के उपाय शुरु कर दिए हैं. इसी मुद्दे पर आज इंडिया न्य़ूज के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया ने देश की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती से लाइव बातचीत की.  
 
सूखे के कारणों और इससे निपटने के केंद्र सरकार के प्रयासों के बारे में पूछने पर उमा भारती ने बताया कि “सूखा केंद्र के लिए चिंता का विषय है. पीने के पानी का गलत तरीके से दोहन हो रहा है. जिसके कारण ये भीषण समस्या उत्पन्न हो रही है. पंजाब, हरियाणा और लातूर में गलत फसल के कारण पीने के पानी का कमी हुई. इसलिए सिचाई के पानी के हिसाब से ही फसलों का उत्पादन होना चाहिए. पानी 10 राज्यों में पड़ रहे सूखे से निपटने के केंद्र सरकार प्रयास कर रही है. 2020 तक केंद्र सरकार शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए 80 हजार करोड़ खर्च करेगी. साथ ही केंद्र सरकार पानी के लिए बिल लाने जा रही है.” 
 
नमामि गंगे परियोजना पर बोलते हुए उमा भारती ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना का पहला रिजल्ट अक्टूबर 2016 से देखने को मिलेगा. दूसरा परिणाम अक्टूबर 2018 और तीसरा परिणाम अक्टूबर 2020 तक आएगा. यानि 2020 के अंत तक गंगा पूरी तरह से निर्मल हो जाएगी. पहले चरण में गंगा का प्रवाह अविरल किया जाएगा और घाटों की सफाई की जाएगी. दूसरे चरण में ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे ताकि कूड़े-कचरे का निस्तारण हो सकें. नमामि गंगे परियोजना के तीसरे चरण में गंगा के शुद्धिकरण के प्रयास किए जाएंगे. 
 
पीने के पानी के समुंद्र में मिल जाने के मुद्दे पर उमा भारती ने कहा कि कुछ पर्यावरणविद नदियों की नेटवर्किंग में रो़डा अटका रहे हैं. जिससे केंद्र सरकार को तमाम तरह की दिक्कतें आ रही हैं. साथ ही उत्तराखंड-मध्यप्रदेश केन-वेतवा लिंक पर उमा ने कहा कि ये काम 5 से 7 साल में पूरा हो जाएगा.