नई दिल्ली. फार्मा मूल्य नियामक राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्य प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर, मधुमेह, गठिया, जैसी गंभीर बिमारियों के शिकार आम लोगों को बड़ी राहत दी है. NPPA ने इन बिमारियों के इलाज में काम आने वाली 54 दवाओं की कीमतों में 55 फीसदी तक की कटौती कर दी है. 
 
NPPA के चेयरमैन भूपिंदर सिंह ने कहा कि गंभीर बीमारियों की दवाईयों के दाम कम करने का खास मकसद आम लोगों तक इनकी पहुंच बढाना है, साथ ही नई आने वाली दवाईयों के दाम ना बढ़े इसका प्रयास है. मंगलवार तो जारी किए गए नोटिफिकेशन में NPPA ने मैन्युफैक्चरर्स, डिस्ट्रिब्यूटर्स, और रिटेलर्स से इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है.
 
इसके अलावा केंद्र ने 11 दवाओं के खुदरा मूल्य भी तय किए हैं. नियामक ने बयान में कहा, एनपीपीए ने दवा (मूल्य नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2016 की अनुसूची एक के तहत 54 दवाओं के दाम निश्चित या संशोधित किए हैं. इसके अलावा डीपीसीओ, 2013 के तहत 11 दवाओं का खुदरा मूल्य भी निर्धारित किया गया है. पिछले महीने सरकार ने कुछ दवाओं के पैक के मूल्य निर्धारित किए थे.
 
सरकार किसी एक इलाज खंड में सभी दवाओं के औसत के हिसाब से आवश्यक दवाओं का मूल्य तय करती है. इन दवाओं की बिक्री एक प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए. इसके अलावा वह सभी दवाओं के मूल्यों का नियमन करती है. कंपनियों को ऐसी दवाओं का दाम एक साल में 10 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति होती है.
 
सरकार ने डीपीसीओ 2013 को अधिसूचित किया है. यह 15 मई, 2014 से प्रभावी है. इसके दायरे में 680 दवा फार्मूलेशन आते हैं. इसने 1995 के आदेश का स्थान लिया है जिसके दायरे में सिर्फ 74 थोक दवाएं आती थीं.