लखनऊ. भारतीय मरीन इंजीनियर संतोष भारद्वाज समुद्री डाकुओं के चंगुल से रिहा हो गए हैं. 45 दिनों की कैद के बाद नाइजीरियाई समुद्री डाकुओं ने वापस छोड़ दिया है. जिसके बाद बुधवार देर शाम वो भारत में अपने परिवार के बीच लौट आए है. सूत्रों की मानें तो इस मामले में सिंगापुर की शिपिंग कंपनी के अधिकारियों और भारतीय दूतावास की पहल काम आई है. जिसके बाद फिरौती की मोटी रकम लेकर डाकुओं ने संतोष समेत अन्य देशों के पांच कर्मियों को भी छोड़ा दिया है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी संतोष के परिजनों को ट्वीट कर बधाई दी है.
 
‘अंग्रेजी में भी बात किया करते थे डाकू’
संतोष ने अपने 47 दिनों की पूरी कहानी बताते हुए कहा कि फिरौती की रकम के लिए लुटेरे उन लोगों को किसी सुनसान टापू पर लेकर गए थे. संतोष ने बताया कि वे कच्चा मांस खाते थे और कुछ खाने से पहले जादू टोना जैसी अजीबोगरीब हरकतें किया करते थे. हर वक्त ऐसी ही प्रोसेस किया करते थे. वे हमारे सामने ही जंगली जानवरों को काट देते थे. हालांकि हम पांच बंधकों की उन्होंने पिटाई नहीं की. संतोष ने यह भी बताया कि डाकू लोकल भाषा के अलावा अंग्रेजी में भी बात किया करते थे.
 
परिजनों ने लगाई थी गुहार
संतोष के परिजनों ने मामले की फरियाद पीएम के रवीन्द्रपुरी स्थित जनसम्पर्क कार्यालय से लेकर विदेश मंत्रालय तक की थी. मामले का संज्ञान लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नाइजीरियाइ सरकार पर संतोष को मुक्त कराने के लिए दबाव बनाया. वहीं संतोष के साले ज्ञानप्रकाश का कहना है कि भारत सराकर के दबाव पर कंपनी ने डाकुओं को फिरौती देकर आठ मई को संतोष को मुक्त कराया है.
 
क्या है पूरा मामला
मंडुवाडीह के राजतिलक नगर के रहने वाले संतोष भारद्वाज सिंगापुर के ट्रांस ओशन लिमिटेड में मरीन इंजीनियर हैं. संतोष ने बताया कि 25 मार्च की रात 12:30 बजे नाइजीरियन शिप पोर्ट से 50 किमी दूर था.  इस दौरान 8 से 10 की संख्या में असलहों से लैस समुद्री डकैतों ने उनके शिप को घेर लिया और फायरिंग शुरू कर दी.  फायरिंग के आगे शिप के सिक्युरिटी गार्ड टिक नहीं पाए. जिसके बाद डकैतों ने 5 लोगों को लाइफ जैकेट पहनाकर एक दूसरी बोट के जरिए किसी सुनसान जंगली टापू पर लेकर चले गए.  वहां पहले से ही दर्जनों की संख्या में दूसरे समुद्री लुटेरे मौजूद थे.