नई दिल्ली. कॉल ड्रॉप मामले में मोबाइल कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. बुधवार को कोर्ट ने ट्राई के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा है कि कॉल ड्रॉप होने पर अब कंपनियों को इसके लिए हर्जाना नहीं देना होगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि ट्राई की ओर से मोबाइल कंपनियों पर तुगलकी फैसले लादने का कोई तुक नहीं बनता.
 
बता दें कि ट्राई ने दूरसंचार कंपनियों से कॉल ड्रॉप होने पर ग्राहक को एक रुपए प्रति कॉल ड्रॉप भुगतान करने को कहा था. हाई कोर्ट ने ट्राई के फैसले को सही ठहराते हुए सेलुलर ऑपरेटर्स की याचिका खारिज कर दी थी. सेलुलर ऑपरेटर्स (दूरसंचार कंपनियों) के संगठन सीओएआई और भारती एयरटेल, वोडाफोन समेत 21 दूरसंचार कंपनियों ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
 
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद 3 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था. कंज्यूमर्स सेसायटी का तर्क है कि कंपनियां संभाल नहीं पा रहीं, फिर भी नए कस्टमर्स जोड़ रही हैं. टेलीकॉम कंपनियों ने दलील दी थी की 2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्पेक्ट्रम की नीलामी कराए जाने से सेक्टर एक तरह से बर्बाद हो गया और कंपनियां कर्ज के बोझ तले दब गईं हैं. उन्हें स्पेक्ट्रम के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है ऐसे में कॉल ड्रॉप मामले में कोई छूट नहीं देकर उनका बोझ और नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.