नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अब मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए केवल एक ही परिक्षा देनी होगी. कोर्ट ने कहा है कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए छात्रों को सिर्फ राष्ट्रीय पात्रता-सह-परीक्षा(नीट) ही देनी होगी, राज्य अपनी तरफ से कोई भी परीक्षा नहीं लेंगे.
 
इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन छात्रों ने एक मई को नीट-1 परीक्षा दी है वे 24 जुलाई को नीट-2 में भी बैठ सकेंगे. लेकिन उनको नीट-1 की दावेदारी छोड़नी होगी. कोर्ट ने कहा, ‘जिन छात्रों को लगता है कि उन्हें नीट-1 की तैयारी के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिला, वे नीट-2 भी दे सकते हैं. लेकिन ऐसे छात्रों को नीट-1 की दावेदारी छोड़नी होगी. दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों के नीट-2 के अंक ही मान्य होंगे. इसके अलावा जिन छात्रों ने नीट-1 के लिए आवेदन किया, लेकिन किसी वजह से परीक्षा नहीं दे सके, वे भी नीट-2 में बैठ सकते हैं.’
 
सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई के ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) को एनईईटी माने जाने के लिए केंद्र, सीबीएसई और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा अपने समक्ष रखे गए कार्यक्रम को मंजूरी दी थी. जिन्होंने एआईपीएमटी के लिए आवेदन नहीं किया था, उन्हें 24 जुलाई के एनईईटी में बैठने का मौका दिया जाएगा और सम्मिलित नतीजा 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा, ताकि प्रवेश प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी हो जाए.
 
करीब 6.5 लाख छात्र एनईईटी-1 परीक्षा में 1 मई को बैठे थे. कोर्ट ने राज्य सरकारों, निजी मेडिकल कॉलेजों और वेल्लोर एवं लुधियाना स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेजों की यह दलील खारिज कर दी कि अलग प्रवेश परीक्षाएं कराने के लिए वे विधायी रूप से सक्षम हैं.