नई दिल्ली. उत्तराखंड में राष्ट्पति शासन हटाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई बुधवार तक टल गई है. कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा कि उसे फ्लोर टेस्ट करने के बारे में सोचना चाहिए. कोर्ट ने पिछली सुनवाई (27 अप्रैल) में केंद्र से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की वजह पूछी थीं? केंद्र से इसी तरह के 7 सवाल किए गए थे. 
 
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक केस का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया, ‘उत्तराखंड में हमारी निगरानी में फ्लोर टेस्ट क्यों नहीं हो सकता?’ बता दें कि हरीश रावत के खिलाफ कांग्रेस में बगावत होने के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक संकट चल रहा है. 9 बागी कांग्रेस विधायकों को स्पीकर ने डिस्क्वालिफाई कर दिया है. इसी उठापटक के बीच केंद्र की सिफारिश पर यहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लागू प्रेसिडेंट रूल हटा दिया था.
 
सुप्रीम कोर्ट के केंद्र पूछा कि ‘क्या आर्टिकल 175 (2) के तहत गवर्नर सरकार को फ्लोर टेस्ट के लिए मैसेज भेज सकते थे. क्या गवर्नर असेंबली के स्पीकर से वोटों के डिवीजन के बारे में सवाल कर सकते हैं? क्योंकि दोनों ही कॉन्स्टिट्यूशनल अथॉरिटी हैं’. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या फ्लोर टेस्ट में देरी राज्य में प्रेसिडेंट रूल लगाने का आधार हो सकती है.
 
न्यायालय ने राष्ट्रपति की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सवाल किया कि राष्ट्रपति की भूमिका कब सामने आती है. न्यायालय ने यह भी पूछा था, क्या शक्ति परीक्षण में हो रही देरी को राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा के लिए आधार बनाया जा सकता है.