नई दिल्ली. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि आभूषण कारोबारियों को सोने पर एक फीसदी उत्पाद शुल्क देना ही होगा. जेटली ने कहा कि यह शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों के लिए ही है और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई उत्पीड़न न हो. जेटली ने राज्यसभा में कहा, “सोने के आभूषण पर उत्पाद शुल्क देना ही होगा.
 
आभूषण कारोबारी हालांकि उत्पीड़न से बचने के लिए कोई अन्य प्रावधान का सुझाव दे सकते हैं.” उन्होंने कहा कि एक फीसदी उत्पाद शुल्क सिर्फ उन्हीं आभूषण कारोबारियों पर लागू होगा, जिसका कारोबार कम से कम 12 करोड़ रुपये का है. यह छोटे कारोबारियों पर लागू नहीं होगा. 
 
देशभर के आभूषण कारोबारी एक फीसदी उत्पाद शुल्क के विरोध में छह हफ्ते हड़ताल पर थे. जेटली ने कहा, “सोने के कारोबारी पहले की तरह स्व-प्रमाणन के जरिए रिटर्न फाइल करते रहेंगे. उत्पाद शुल्क भुगतान के लिए जा-जाकर जांच नहीं किया जाएगा. जिस दर पर भी वे वैट (एक फीसदी) जमा कर रहे हैं, वही दर वे उत्पाद शुल्क के रूप में जमा करेंगे.” उन्होंने कहा, “मैंने उद्योग संघों से कहा है कि यदि कोई उत्पीड़न होता है, तो उसकी जानकारी मुझे दें. केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने भी कारोबारियों को यह सूचना दे दी है.” 
 
उन्होंने कहा, “यदि हमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की तरफ बढ़ना है, तो पहला कदम है विलासिता के सामानों पर कर लगाना. कोई भी राजनीतिक पार्टी विलासिता की वस्तुओं को कर दायरे से बाहर रखने और 18 फीसदी कराधान की मांग एक साथ नहीं कर सकती है, क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता है.”
 
जेटली ने यह भी कहा कि सोने के आभूषण निर्माताओं के लिए पंजीकरण की समय सीमा 31 मार्च 2015 से बढ़ाकर 30 जून 2016 कर दी गई है. उन्होंने कहा, “हमने पंजीकरण की समय सीमा दो महीने के लिए बढ़ा दी है. तब तक लाहिड़ी समिति की रिपोर्ट भी आ जाएगी.” सरकार ने आभूषण पर उत्पाद शुल्क का विश्लेषण करने के लिए अशोक लाहिड़ी उप-समिति का गठन किया है. 
 
जेटली ने कहा कि इस वक्त सोने पर सीमा शुल्क 10 फीसदी है. इसे और नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि इससे तस्करी बढ़ेगी. उन्होंने कहा, “सीमा शुल्क बढ़ाया नहीं जा सकता. सोने पर सेवा कर लागू नहीं है. इसलिए विकल्प के रूप में सिर्फ उत्पाद शुल्क है.” कांग्रेस पार्टी पर जीएसटी विधेयक को संसद में पारित करने में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “जैसे ही कांग्रेस समर्थन करेगी और जीएसटी लागू होगा, वैसे ही वैट और उत्पाद शुल्क को मिलाकर एक कर दिया जाएगा.”