नई दिल्ली: पाकिस्तान से भारत आए अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया आसान की जाएगी. मोदी सरकार ने रविवार को इसकी घोषणा की. पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को जल्द यहां संपत्ति खरीदने, बैंक खाते खोलने और पैन और आधार कार्ड हासिल करने की इजाजत दी जाएगी क्योंकि मोदी सरकार इन लोगों के लिए विशेष सुविधाओं की योजना बना रही है. 
 
200 रू में नागरिकता
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि प्रस्ताव में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ‘लंबी अवधि का वीजा’ देने का विचार किया जा रहा है. प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे लोगों से बहुत कम फीस लेकर 18 जिलों के जिलाधिकारियों को दो साल की अवधि में नागरिकता देने तक का अधिकार दिया जाएगा. मोदी सरकार इन लोगों को जो अन्य सहूलियतें देने के बारे में विचार कर रही है उनमें भारत के नागरिक के तौर पर पंजीकरण के लिए शुल्क को 15 हजार रुपये देने होते हैं. इसकी जगह सौ-सौ रुपये देने होंगे.
 
भारत में रह रहे हैं 2 लाख लोग
भारत में रहने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों की वास्तविक संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है, हालांकि अनुमानित आधिकारिक आंकड़े के अनुसार ऐसे करीब दो लाख लोग हैं. ये जिले हैं रायपुर (छत्तीसगढ़), अहमदाबाद, गांधीनगर, राजकोट, कच्छ और पाटन (गुजरात), भोपाल और इंदौर (मध्य प्रदेश), नागपुर मुंबई, पुणे और ठाणे (महाराष्ट्र), पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र), जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर (राजस्थान) और लखनऊ(उत्तर प्रदेश) पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की करीब 400 बस्तियां हैं.
 
पैन और आधार नंबर भी ले सकेंगे
एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान से आए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की लंबी अवधि के वीजा पर भारत में रहने वालों की कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने यह भी योजना बनाई है कि ऐसे लोगों को बैंक खाता खोलने, पैन और आधार नंबर लेने की इजाजत दे दी जाए. अधिकारी ने बताया कि यह अभी केवल प्रस्ताव के चरण में है और इस प्रस्ताव पर जनता की प्रतिक्रिया एवं सुझाव मांगे गए हैं. इससे मिली जानकारी गृह मंत्रालय की विदेशी शाखा को भेजा जी सकती है. 
 
उत्पीड़न की वजह से रह रहे हैं भारत
अधिकारी ने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिक धार्मिक उत्पीड़न की वजह से या उत्पीड़न के शिकार होने के डर से भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हैं. इनमें से बहुत सारे लोग भारत में बगैर किसी मान्य यात्रा दस्तावेज के या ऐसे दस्तावेज के जरिए आए हैं, जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है.
 
मानवता के आधार पर भारत में रहने की दी छूट
सरकार ने पिछले वर्ष सितंबर में मानवता के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों को, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हैं, यात्रा दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी रहने की छूट दी है.