आगरा: भारत की यात्रा पर आए ब्रिटेन की शाही जोड़ी प्रिंस विलियम पत्नी केट मिडलटन के साथ शनिवार को ताजमहल देखने पहुंचे. शाही जोड़ी की यह तीसरी पीढ़ी है जो यहां आई थी. शाही जोड़ी ने उसे बेंच पर बैठकर फोटो खिंचवाई जहां 1992 में प्रिंस डायना ने पोज दिया था. 17वीं शताब्दी में शाहजहां की बनाई इस ‘मोहब्बत की निशानी’ को शाही दंपत्ति के लिए यादगार बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारी कड़े इंतज़ाम किए थे. बता दें कि विलियम और केट भूटान से एक विशेष प्लेन से आगरा पहुचें थे.
 
 
केट ने क्या कहा?
केट और विलियम ने यहां विजिटर बुक में साइन किए. रॉयल कपल करीब एक घंटा यहां रहा. केट ने कहा कि ताजमहल काफी सुंदर है. यह आर्किटेक्ट का बेहतरीन नूमना है. यहां आने का सालों से मेरा सपना था जो आज पूरा हो गया.
 
 
टिकट खरीदकर किया ताज का दीदार
ब्रिटेन का शाही जोड़ा प्रिंस विलियम और केट विलियम ताजमहल बन्द नहीं रहेगा. डायना की तरह कैट और विलियम भी आम लोगों के बीच में ही ताज देखा. इतना ही नहीं ये जोड़ा आम लोगों की तरह ही अपना टिकट खरीदकर ताजमहल का दीदार किया.
 
 
डायना की बेंच
प्रिंस विलियम की मां राजकुमारी डायना 24 साल पहले 11 फरवरी 1992 को ताज महल आई थीं. राजकुमारी डायना अकेले ही इस इमारत को देखने आई थीं. उस वक्त ताज महल के सामने एक बैंच पर डायना ने अकेले बैठकर एक तस्वीर खिंचाई थी जिसने दुनिया भर के अखबारों के पहले पन्ने पर जगह बनाई थी. साथ ही प्रिंस चार्ल्स के साथ उनकी शादी में चल रही परेशानियों का भी ज़िक्र हुआ था और 1996 में इन दोनों ने तलाक ले लिया था. इस बेंच पर लिए गए डायना के फोटोज इतने फेमस होने के बाद में इस बेंच का नाम ही ‘डायना बेंच’ रख दिया गया. डायना वाली ‘उस बैंच’ की भी मरम्मत कर दी गई है और सीढ़ियों पर नई पुताई भी हो गई है.
 
 
सख्त सिक्युरिटी
ताज के आसपास के इलाकों में खुफिया एजेंसियां मौजूद थीं. लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) यहां के होटलों में रुकने वाले लोगों की लिस्ट तैयार और अपडेट कर रहा थे. ताज के आसपास ATS और स्वैट कमांडो तैनात थे. विजिट के दौरान सभी ऊंची इमारतों और रोड के साथ ताज महल में भी सिक्युरिटी एजेंट्स तैनात थे. SP रैंक के अफसर ताज के तीनों गेटों पर सिक्युरिटी संभाल रहे हैं. 
 
 
कभी अंग्रेजों ने ही ताज को किया था नीलाम
जिस ताज महल का दीदार करने रॉयल कपल आए, उसे पहली बार 1828 में अंग्रेजों ने नीलाम तक कर दिया था. इतिहासकार प्रो. रामनाथ ने ‘The Taj Mahal’ बुक में इस घटना का जिक्र किया है. अंग्रेज लेखक एचजी. कैन्स ने ‘आगरा एंड नाइबर हुड्स’ बुक में भी इस बारे में बताया है. दोनों बुक के मुताबिक, 1828 में गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिक के ऑर्डर पर कोलकाता के अखबार में ताज का टेंडर जारी किया गया था. उस समय अंग्रेजों ने कोलकाता को राजधानी बनाया था. टेंडर निकलने के बाद मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद ने 1.50 लाख में बोली लगाकर ताज को खरीदा था. सेठ का परिवार आज भी मथुरा में रहता है.