श्रीनगर. अलगाववादियों के बंद के चलते मंगलवार को पूरी कश्मीर घाटी में आम जनजीवन प्रभावित रहा. बंद की वजह से ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर व घाटी के अन्य शहर व नगरों में दुकानें, सार्वजनिक परिवहन व अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान व शिक्षण संस्थान बंद रहे. श्रीनगर व घाटी के अन्य जिलों के बीच परिवहन स्थगित रहा. शहर में सार्वजनिक वाहनों की उपलब्धता न होने की वजह से सरकारी कार्यालयों, बैंकों व डाकघरों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही. 
 
बंद अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक, मुहम्मद यासीन मलिक और अन्य ने कश्मीर घाटी के बाहर शैक्षिक व प्रोफेशनल संस्थानों में कश्मीरी विद्यार्थियों के कथित उत्पीड़न के विरोध में बुलाया है. कश्मीर बार एसोसिएशन ने बंद का समर्थन किया और इस क्रम में मंगलवार को अदालतों से दूरी बनाए रखी. 
 
अधिकारियों ने गिलानी व मीरवाइज को श्रीनगर में नजरबंद रखा रहा है. वहीं, यासीन मलिक को बंद से दो दिन पहले ही ऐहतियातन हिरासत में ले लिया था और एक स्थानीय पुलिस थाने में रखा है. श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य जिला मुख्यालयों के संवेदनशील इलाकों में पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिसबल (सीआरपीएफ) के जवान तैनात हैं.
 
क्या था मामला?
NIT कैम्पस में 31 मार्च को तनाव शुरु हुआ जब कुछ कश्मीरी छात्रों ने टी 20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत पर वेस्टइंडीज की जीत की खुशी में पटाखे जलाए. इसके अगले दिन कुछ छात्रों ने शुक्रवार की नमाज अदा करके लौट रहे कश्मीरी छात्रों की पिटाई कर दी. सुरक्षाबलों ने कैम्पस में छात्रों के दो गुटों को खदडऩे के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बाद ‘भारत माता की जय’ बोलने से इंकार करने पर छात्रों ने एक कश्मीरी युवक की कथित रूप से पिटाई कर दी जिसके बाद से एनआईटी कैम्पस में स्थिति तनावपूर्ण है. हुर्रियत कांफ्रेंस समेत अलगाववादी संगठनों ने कश्मीरी छात्रों पर हमला करने के लिए गैर कश्मीरी छात्रों की आलोचना की.