नई दिल्ली. वाटर ट्रेन मंगलवार सुबह पांच लाख लीटर पानी लेकर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखा प्रभावित लातूर पहुंच गई है. पानी से भरे 10 वैगन के साथ वाटर ट्रेन सोमवार को मिराज से रवाना हुई थी. एक वैगन में 50 हजार लीटर पानी है. ट्रेन के लातूर पहुंचने पर उसका स्वागत किया गया. मराठवाड़ा क्षेत्र अब तक के सबसे भयंकर सूखे की मार झेल रहा है.
 
लातूर में जलापूर्ति के लिए ये रेलवे वैगन राजस्थान में कोटा से सोमवार को मिराज पहुंचे थे. अब ट्रेन का पानी पाइपलाइन के जरिए स्टेशन के पास बावड़ी में खाली किया जाएगा. फिर टैंकर्स के जरिये शहर तक पहुंचाया जाएगा. रेलवे और राज्य सरकार के आदेशों के बाद इस ट्रेन को चलाया गया था. 
 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा था, 50 टैंक वैगन लातूर के लिए मिराज पहुंचे हैं. आठ अप्रैल को लातूर के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए पानी के 50 वैगन वाली दो मालगाडि़यों में से एक गाड़ी कोटा वर्कशाप से पुणे मंडल में मिराज के लिए रवाना हुई. रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि 50 वैगन वाली दूसरी मालगाड़ी के 15 अप्रैल के आसपास पानी चढ़ाने के लिए तैयार रहने की संभावना है. उसने कहा, रेल मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, कोटा वर्कशाप को 50-50 टैंक वैगन वाली दो मालगाड़ियां मिली हैं और इनके फेरे आवश्यकता के मुताबिक तय किए जाएंगे. इन वैगन की ढुलाई क्षमता प्रति वैगन 54,000 लीटर है.
 
CM बोले-कड़ी मेहनत कर रहा है रेलवे 
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार और रेल मंत्रालय सूखा प्रभावित क्षेत्र में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं.
 
दूसरी गाड़ी भेजने की भी तैयारियां! 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा था, ‘50 टैंक वैगन लातूर के लिए मिराज पहुंचे हैं.’ आठ अप्रैल को लातूर के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए पानी के 50 वैगन वाली दो मालगाड़ियों में से एक गाड़ी कोटा वर्कशाप से पुणे मंडल में मिराज के लिए रवाना हुई. रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि 50 वैगन वाली दूसरी मालगाड़ी के 15 अप्रैल के आसपास पानी चढ़ाने के लिए तैयार रहने की संभावना है.
उन्होंने कहा, ‘रेल मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, कोटा वर्कशाप को 50-50 टैंक वैगन वाली दो मालगाड़ियां मिली हैं और इनके फेरे आवश्यकता के मुताबिक तय किए जाएंगे. इन वैगन की ढुलाई क्षमता प्रति वैगन 54,000 लीटर है.’
 
घरों तक पानी पहुंचने में लगेंगे तीन दिन
बताया जा रहा है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी से भरी ट्रेन तो पहुंच जाएगी लेकिन घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप बिछाने का काम जारी है. 5 लाख लीटर पानी के लिए लिए अभी पाइप बिछाने में तीन दिन लग सकते हैं.
 
कहां-कहां हैं सूखे जैसे हालात?
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में नदी और डैम पूरी तरह से सूख चुके हैं. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी बेहाल. यूपी और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में बंदूकों के सहारे पानी की निगरानी की जा रही है.
 
कई जगहों पर धारा 144
लातूर शहर में पानी को लेकर संघर्ष रोकने के लिए तालाब के पास धारा 144 लगा दी गई है. पानी के टैंकरों से इलाके के लोगों की प्यास बुझाई जा रही है. खरीफ के मौसम में पूरे महाराष्ट्र में करीब 15750 गांव सूखे से बुरी तरह प्रभावित हैं.  केंद्र सरकार ने 3049 करोड़ रुपए राहत के लिए मंजूर किए हैं. केंद्र की ओर से मिलने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी मदद है. सरकार ने उन लोगों की मदद करने का फैसला किया है, जिनकी फसलों और मकानों को 2015 में बेमौसम बारिश और ओले की वजह से भारी नुकसान पहुंचा था.