नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता, देश के जाने माने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था चरमराई हुई है. उन्होंने कहा कि हमारे देश का दुर्भाग्य है कि बहुत सारे न्यायाधीश बेवकूफ और नासमझ होते हैं और बहुत सारे न्यायाधीश बेईमान भी होते हैं. क्योंकि न्यायपालिका में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की कोई जवाबदेही नहीं होती है. प्रशांत भूषण ने भोपाल में एक टॉक शो के दौरान कहा कि देश में न्यायपालिका एक बहुत ही अहम संस्थान है. इसे सुधारने के लिए देश में कानूनी जागरूकता के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का एक बड़ा आंदोलन चलाना होगा.
 
न्याय व्यवस्था में पनप रहा है भ्रष्टाचार
प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार और न्यायपालिका से स्वतंत्र ऐसी कोई संस्था नहीं है जहां न्यायपालिका की शिकायत की जा सके. इस वजह से न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार भी खूब पनप रहा है. जिस तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में अन्ना हजारे के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन चलाया गया. उसी प्रकार देश की न्याय व्यवस्था के प्रति सामाजिक जागरूकता के लिए एक बड़ा आंदोलन चलाना होगा
 
कानूनी जागरूकता जरूरी
उन्होंने आगे यह भी कहा कि देश में कानूनी जागरूकता जरूरी है और सरकार के खिलाफ तो आप न्यायालय में जा सकते हैं. लेकिन अदालत की प्रणाली गड़बड़ाई हुई है और वहां आपकी सुनवाई नहीं होती है. लंबी-लंबी तारीखें मिलती हैं.
 
जज सेवानिवृत्त के बाद कर रहे हैं आर्बिटेशन
इसके अलावा उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यस्था चरमराने का ही परिणाम है कि अधिकतर न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने के बाद मध्यस्थता (आर्बिटेशन) करने लगे हैं. आर्बिटेशन एक ऐसा उद्योग बन गया है जिसमें शीर्ष अदालत के बहुत सारे न्यायाधीश शामिल हैं और कई करोड़ो रुपये कमा रहे हैं. इसलिए न्याय व्यवस्था के बदलाव में उनकी कोई रूचि नहीं है.