मुंबई: शिवसेना ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में मोदी के अच्छे दिन वाले पर चुटकी लेते हुए कहा कि अच्छे दिन कब आएंगे. गुड़ीपड़वा के मौके पर शिवसेना ने कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र तक के कई मसलों को लेकर पीएम को घेरा है. संपादकीय ने कई ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया है, जिससे देश की छवि धूमिल हुई है. इसके अलावा सामना में पीएम से कई सवाल पूछे गए है. शिवसेना का कहना है कि मीठे पकवान बनाकर, त्योहार मनाएं, आनंद मनाएं महाराष्ट्र की ऐसी स्थिति नहीं है.
 
‘टैक्स की मार झेल रहे हैं लोग’
उन्होंने कहा, ‘देश में हालात अंधकारमय है और भारी रोष है. जवान सीमा की रक्षा करने के लिए कठोर परिश्रम कर रहे हैं और किसान खेतों में पसीना बहा रहे हैं… सरकार का लोगों द्वारा कठिन परिश्रम से अर्जित कर बैंकों में जमा किए धन से कुछ लेना-देना नहीं है. माल्या जैसे लोग धन लेते हैं और देश से भाग जाते हैं.’
 
सोने जैसे राज्य में सोने-चांदी की दुकानें बंद
सरकार द्वारा बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी पर तंज कसते हुए लिखा गया है कि सोने-चांदी जैसे राज्य में आज सोने-चांदी वाले दुकानें बंद करके बैठे है. लाखों मजदूरों के चूल्हे जलते भी है या नहीं, इसकी किसी को परवाह नहीं. सरकार द्वारा नया कानून लागू करने के फैसले पर शिवसेना का कहना है कि इशके तहत मकान मालिक किराएदार को कभी भी घर से बाहर निकाल सकता है.
 
पीएम की विदेश यात्रा पर ली चुटकी
पीएम की विदेश यात्रा पर चुटकी लेते हुए सामना में लिखा गया है कि पीएम विदेश यात्रा में लगे है, लेकिन कोई भी देश भारत के साथ दृढ़ता से खड़ा नहीं है. शिवसेना ने लिखा है कि पीएम के विदेश यात्राओं को छोड़कर दुनिया का कोई भी देश भारत के कई मुद्दों से इतेफाक नहीं रखता है. उन्होंने मोदी का नाम लिए बिना कहा, ‘क्या हमारे देश में ऐसा होगा. एक तरफ ब्रिटिश प्रधानमंत्री वापस आते हैं. हमारे प्रधानमंत्री बाहर जाते हैं.’ नारे लगाने को लेकर विवाद पर टिप्पणी करते हुए ठाकरे ने कहा, ‘यह कहा गया कि जो लोग ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने से मना करते हैं, उन्हें देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है. तब आप किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उनका कॉलर पकड़कर उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान भेज दें.’
 
ये हैं महाराष्ट्र में सूखे के हालात
  • महाराष्ट्र के 34 जिले सूखे की चपेट में हैं। पिछले चालीस सालों में ये अब तक का सबसे बड़ा सूखा है.
  • सूखे का सबसे ज्यादा असर मराठवाड़ा इलाके में देखने को मिल रहा है.
  • यहां के लातूर और परभणी में धारा 144 लगा दी गई है.
  • मराठवाड़ा के कई जलाशयों में पानी 4 फीसदी से भी कम बचा है.
  • महाराष्ट्र में साल 2016 में औसतन हर महीने 90 किसानों ने आत्महत्या की है.