नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में  पुलिस लाठीचार्ज में कई गैर कश्मीरी छात्रों के घायल होने पर जेएनयू में एबीवीपी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. एबीवीपी छात्रों ने एनआईटी में भारत विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ भी विरोध किया और एनआईटी डायरेक्टर का पूतला भी फूंका. एबीवीपी छात्रों ने आरोपी पूलिस वालों की गिरफ्तारी की मांग की है और धमकी दी है कि अगर पूलिसवालों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वो बड़ा आंदोलन करेंगे.
 
किसी के साथ नहीं होगा अन्याय: ईरानी
केंद्रीय मानव संसधान मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि सभी छात्र सेफ रहेंगे और किसी के साथ अन्याय नहीं होंने दिया जाएगा. ईरानी ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात की है और महबूबा ने उन्हें आश्वास्त किया है कि संस्थान के सभी छात्र सुरक्षित रहेंगे और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. ईरानी ने बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों को संस्थान के हालात का जायजा लेने के लिए भेजा.
 
कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग 
जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस ने श्रीनगर एनआईटी की घटना की समयबद्ध न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि बुधवार शाम तक इस मामले पर सरकार का कोई साफ बयान नहीं आता है तो जल्द ही पार्टी का तथ्यान्वेषी दल मौके पर जाएगा. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने छात्राओं समेत एनआईटी के विद्यार्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज की घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस, स्थानीय प्रशासन और NIT प्रशासन की जवादेही तय करने के लिए पूरे मामले की हाईकोर्ट के न्यायाधीश से समयबद्ध जांच कराने की मांग की.
 
क्या था मामला?
NIT कैम्पस में 31 मार्च को तनाव शुरु हुआ जब कुछ कश्मीरी छात्रों ने टी 20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत पर वेस्टइंडीज की जीत की खुशी में पटाखे जलाए. इसके अगले दिन कुछ छात्रों ने शुक्रवार की नमाज अदा करके लौट रहे कश्मीरी छात्रों की पिटाई कर दी. सुरक्षाबलों ने कैम्पस में छात्रों के दो गुटों को खदडऩे के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बाद ‘भारत माता की जय’ बोलने से इंकार करने पर छात्रों ने एक कश्मीरी युवक की कथित रूप से पिटाई कर दी जिसके बाद से एनआईटी कैम्पस में स्थिति तनावपूर्ण है. हुर्रियत कांफ्रेंस समेत अलगाववादी संगठनों ने कश्मीरी छात्रों पर हमला करने के लिए गैर कश्मीरी छात्रों की आलोचना की.