नई दिल्ली. देश में सूखे से हाहाकार मचा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट भी इस मुद्दे को सख्ती से ले रहा है. सूखे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने पहले मुर्गी या अंडा वाली स्थिति बना रखी है. केंद्र और राज्य के बीच मामला नहीं उलझना चाहिए.

अब भी कोर्ट में सुनवाई जारी है. लंच से पहले कोर्ट में बिहार ने कहा कि उनके यहां सूखा नहीं है. केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय की तरफ से अदालत में मनरेगा पर हलफनामा पेश किया गया. इसमें कहा गया था कि राज्यों की ज़रूरत के हिसाब से फंड दिया जाता है.

केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया कि सरकार पूरे  देश में 8.77 लाख तालाब खुदवाने वाली है. इससे सूखा प्रभावित इलाकों में स्थाई राहत पहुंचेगी.

सुनवाई के दौरान बेंच के सदस्य जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि कल आंध्र प्रदेश में मनरेगा के जैम की निगरानी कर रहे एक असिस्टेंट इंजीनियर की मौत हो गई. इससे सूखे की गंभीरता समझी जा सकती है.

स्वराज अभियान के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पूरे देश में मनरेगा के तहत 5.77 करोड़ सक्रिय जॉब कार्ड हैं. इनको काम देने का लक्ष्य राज्यों का है. इसके बाद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद की गैर मौजूदगी पर कोर्ट ने नाराज़गी दिखाई.

जस्टिस रमन्ना ने कहा कि तमाम सवालों का जवाब तलाशना है. पानी की समस्या है, मवेशियों की समस्या है, सूखा कब घोषित करें इसका सवाल है. सुनवाई के दौरान बेंच के अध्यक्ष जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि एएसजी व्यस्त हैं तो फिर ये बेंच क्या करे. क्या हम यहाँ बैठ कर घड़ी देखते रहें?