नई दिल्ली. सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से कहा कि वह अपने सहयोगी राज्य संघों को दिए गए पैसों का ‘मुकम्मल हिसाब’ रखे और कहा कि कुछ राज्यों को बहुत अधिक तो कुछ राज्यों को कुछ भी नहीं मिल रहा है.
 
प्रधान न्यायाधीश टी. एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की खंडपीठ ने कहा, “आपके पास एक संपूर्ण लेखा प्रणाली होनी चाहिए जो कि पारदर्शी हो. आप हर साल भारी रकम का वितरण करते हैं जो हर साल बढ़ती है. यह एक हजार करोड़ तक भी जा सकती है.” 
 
कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट संस्था को ‘पारस्परिक रुप से लाभप्रद समाज’ की तरह चलाया जा रहा है और बोर्ड सदस्यों को आवंटित करोड़ों रुपयों को कैसे खर्च किया गया इसके लिए स्पष्टीकरण नहीं मांगकर उन्हें ‘व्यावहारिक रुप से भ्रष्ट’ बना रहा है.
 
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति एफएमआई खलीफुल्ला की पीठ ने कहा, ‘‘विशेषज्ञों और बड़े पैमाने पर लोगों से सलाह मशविरे के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं और सिफारिशें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने की हैं जो अनुभवी हैं और वे कुछ नतीजों पर पहुंचे हैं.” 
 
बीसीसीआई उच्चतम न्यायालय की शरण में आया था और उसने कहा था कि लोढ़ा पैनल की कुछ सिफारिशों को उसने स्वीकार कर लिया है जबकि अन्य को लागू करने में परेशानियां हैं क्योंकि इसका बोर्ड के संचालन पर विस्तृत असर पड़ेगा.