हैदराबाद. मेट्रोपोलिटिन सत्र न्यायालय ने करोड़ों रुपये के सत्यम कंप्यूटर एकाउंटिंग घोटाले से जुड़े मामले में आज कंपनी के संस्थापक बी रामलिंग राजू तथा नौ अन्य को जमानत दे दी तथा उनकी सात साल की सश्रम कारावास की सजा भी निलंबित कर दी. 

उल्लेखनीय है कि निचली अदालत ने इस मामले में इन सभी को महीने भर पहले दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. इसके बाद इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. हैदराबाद के विशेष न्यायाधीश (आर्थिक अपराध) एम लक्ष्मण ने आज अपने निर्णय में कहा कि राजू और उनके भाई तथा सत्यम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक बी रामा राजू की सजा के अमल को निलंबित किया जाता है. उन्हें एक एक लाख रपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही राशि की दो जमानत देने को कहा गया.

अदालत ने अपने आदेश में आरोपियों से जुर्माना राशि का दसवां हिस्सा रिहाई या जमानत की तारीख से चार सप्ताह के अंदर सुनवाई अदालत में जमा कराने को कहा है. आठ अन्य आरोपियों के मामले में अदालत ने उनकी सजा भी निलंबित कर दी है और उन्हें 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशि की दो जमानतों पर जमानत दी है. इन्हें भी अपने जुर्माने की राशि का दसवां हिस्सा चार सप्ताह में दाखिल करवाने को कहा गया है.

अदालत ने कहा कि अभियुक्तों ने यदि जुर्माने का निर्धारित अंश समय के अंदर नहीं जमा कराया तो उनपर जुर्माने में चूक के लिए तय सजा भुगतनी पड़ेगी. राजू इस मामले में मुख्य अभियुक्त हैं. ये सभी इस समय चेरलापल्ली केंद्रीय जेल में बंद हैं. इन्होंने इस घोटाला मामले में अपनी सजा को चुनौती देते हुए पिछले सप्ताह सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी.

उल्लेखनीय है कि सत्यम कंप्यूटर्स में 7000 करोड़ रपये का घोटाला मामला 2009 में सामने आया था. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) की अदालत ने नौ अप्रैल को राजू व अन्य को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने राजू व रामा राजू पर 5.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जबकि अन्य पर 25-25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. न्यायालय इस मामले में दोषी ठहराये जाने के खिलाफ राजू व नौ अन्य की अपीलों पर अगले महीने सुनवाई करेगा.

IANS