हैदराबाद. हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों एवं दो प्रोफेसरों ने जेल से रिहा होने के बाद कुलपति अप्पा राव को पद से हटाए जाने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि वे दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद से जारी आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं. पुलिस उत्पीड़न ने उनके संकल्प को और मजबूती दी है. यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर एवं 25 छात्र मंगलवार की रात जेल से रिहा होकर यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे जहां उनके दोस्तों ने उनका शानदार स्वागत किया. 
 
परिसर में एक विशाल जुलूस निकाला गया. छात्र क्रांतिकारी नारे लगा रहे थे और नीला झंडा लहरा रहे थे. वे हाथों में मशाल एवं तख्तियां लिए हुए थे. छात्र कुलपति अप्पा राव को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे. कुलपति राव 22 मार्च को लौटे हैं. उसके बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं और पुलिस ने प्रदर्शकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है. गिरफ्तार छात्रों और शिक्षकों ने आधी रात के समय जुटी भीड़ को अपने कटु अनुभव सुनाए. 
 
गिरफ्तार दो प्रोफेसरों में से एक तथागत सेनगुप्ता ने कहा कि पुलिस कार्रवाई आंदोलन को भटकाने का एक प्रयास है. हम इस आंदोलन के जरिये रोहित और सभी वंचित समुदायों के सदस्यों के लिए न्याय चाहते हैं. गणित के असिस्टेंट प्रोफेसर सेनगुप्ता ने कहा कि अप्पा राव और उनके राजनीतिक आकाओं को यह जान लेना चाहिए कि हम इस संघर्ष को छोड़ने वाले नहीं हैं. छात्रों और शिक्षकों ने 22 मार्च की रात को हुई घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें वैन में पीटा, उन्हें गालियां दीं और देशविरोधी कहा. 
 
जेल में एक हफ्ता बिता कर आए प्रोफेसर के.वाई.रत्नम ने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) हमसे कहा कि तुम सब देश विरोधी हो, याकूब मेमन हो और गोमांस खाते हो. उन्होंने हमारी मांओं और बहनों को गाली दी.” तथागत ने कहा कि उस दिन छात्राओं के साथ जो व्यवहार हुआ उसका वर्णन नहीं किया जा सकता. दोनाथ प्रशांत नाम के एक छात्र नेता ने कहा कि छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की गई.