नई दिल्ली. तीन बार तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मुस्लिम महिलाओं को लेकर बनाई गई हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. याचिकाकर्ता के मुताबिक यूपीए-2 के वक्त मुस्लिम महिलाओं को लेकर हाई लेवल कमेटी बनाई गई थी.

कमेटी ने Women and the law : an assessment of family laws with focus on laws relating to marriage, divorce, custody, inheritance and succession नाम से रिपोर्ट तैयार की थी और ये रिपोर्ट 2015 में महिला कल्याण मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी थी. लेकिन ये पब्लिक डोमेन में नहीं है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि ये रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जाए. मामले की सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी. बता दें कि इस मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

वहीं सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में खुद को भी पक्ष बनाने की मांग की थी. कोर्ट ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी पक्ष बनाया. सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित शायरा बानो की तरफ से कहा गया कि इस मामले में केंद्र सरकार ने एक हाई लेवल कमिटी बनाई थी.

दरअसल तलाक-तलाक-तलाक ‘यानि तीन बार तलाक़’ और पुरुषों की चार शादियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को महिलाओं के समान अधिकार का उल्लंघन करार देते हुए स्वत: संज्ञान लेकर चीफ जस्टिस के पास भेजा था.

एक मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उनके पति ने 3 बार तलाक़ बोलने मात्र से उसे तलाक दे दिया  है. सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने याचिका दाखिल की है. शायरा को उनके पति ने तीन बार तलाक़ कह के तलाक़ दे दिया था.

वहीं इस मामले में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है क्योंकि ये कोई विधायिका का बनाया एक्ट नहीं बल्कि संविधान का दिया अधिकार है.