मुंबई. कर्ज नहीं चुका पाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या ने फार्मा कंपनी सनोफी इंडिया लिमिटेड (एसआईएल) का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है. कंपनी ने यहां एक बयान जारी कर यह जानकारी दी. कंपनी ने जारी अपने बयान में कहा कि माल्या ने आगामी सालाना आम बैठक में फिर से निदेशक चुने जाने की दावेदारी नहीं करने का अपना फैसला जता दिया है. माल्या पहली बार कंपनी में 1973 में निदेशक बने थे. तब कंपनी का नाम होएस्ट फार्माश्यूटिकल्स लिमिटेड था. माल्या दिसंबर 1983 से ही कंपनी के बोर्ड के अध्यक्ष हैं.
 
माल्या ने अपने बयान में कहा, “मुझे इस कंपनी के बोर्ड की अध्यक्षता करने और इतनी लंबी अवधि तक इसके शानदार विकास और समृद्धि बढ़ाने का सुअवसर मिला है.” माल्या के बारे में ब्रिटेन में छुपे होने की बात की जा रही है. काले धन की हेराफेरी के मामले में देश के प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें तलब किया है. माल्या ने इस आरोप को हालांकि गलत बताया है कि वह भागे हुए हैं. उन्होंने कहा है कि वह एक अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी हैं और अभी कारोबारी दौरे पर हैं और मार्च अंत तक वापस आएंगे.
 
सनोफी के प्रबंध निदेशक शैलेश अय्यंगर ने कहा कि माल्या के नेतृत्व में गत 10 साल में कंपनी की बिक्री 800 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये हो गई और शेयरों की कीमतत 1,655 रुपये से बढ़कर 4,358 रुपये हो गई. वहीं, बाजार मूल्य तीन गुना हो गया और कर्मचारियों की संख्या 1,500 से बढ़कर 3,700 हो गई.
 
एसआईएल ने कहा है कि आदित्य नारायण और उषा थोराट को 30 अप्रैल 2016 से पांच साल तक की अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि 64 वर्षीय आदित्य नारायण माल्या की जगह लेंगे.