नई दिल्ली. भारत विविधताओं का देश है जहां साल भर कोई ना कोई पर्व त्योहार मनाया जाता है. लेकिन रंगों के त्योहार ‘होली’ जैसी मस्ती शायद ही किसी और त्योहार में देखने को मिलती हो. देशभर में महीने भर पहले से ही होली की तैयारी शुरु हो जाती है और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है. होली का त्योहार भले ही भारत में मनाया जाता हो, लेकिन रंग और गुलाल के इस त्योहार को अब दुनियाभर में पहचान मिल चुकी है. हर्षोल्लास के इस पर्व पर सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. आज देशवासी एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की बधाई दे रहे हैं. होली वो त्योहार है जहां दुश्मनों को भी गले लगाकर होली की बधाई दी जाती है.
 
ब्रज में मनाई जाती है लट्ठमार होली
उत्तर प्रदेश का मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव यह पूरा ब्रज का इलाका है और यहां होली की सबसे ज्यादा मस्ती देखने को मिलती है. सप्ताह भर पहले से ब्रज में होली की मौज-मस्ती शुरू हो जाती है. यहां मनायी जाने वाली लट्ठमार होली और लड्डू की होली तो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है और हर साल हजारों सैलानी इस होली में शामिल होने के लिए यहां आते हैं.
 
कुमाऊंनी होली 
उत्तराखंड के कुमाउं क्षेत्र में भी होली धूमधाम से मनायी जाती है. कुमाऊंनी होली सिर्फ रंगों से नहीं बल्कि रागों से खेली जाती है. यहां मुख्य रूप होली दो तरह से मनायी जाती है- खड़ी होली और बैठकी होली. बैठकी होली में होल्यार रंग से सराबोर होकर बैठकर शास्त्रीय धुनों पर होली गाते हैं. यह होली बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है। तो वहीं, खड़ी होली, होली के दिन खड़े होकर गायी जाती है. बैठकी होली महिलाओं द्वारा भी की जाती है.
 
क्यों मनाई जाती है होली?
कहा जाता है कि किसी समय एक शक्तिशाली राक्षस राजा हिरण्यकश्यप था जो खुद को ईश्वर मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें. लेकिन उसके ही बेटे प्रहलाद ने उसे भगवान मानने से इनकार कर दिया और भगवान विष्णु की पूजा करने लगा. बहुत समझाने बुझाने पर भी जब प्रहलाद नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का एक तरीका सोचा. उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में बिठाकर आग में प्रवेश कर जाए, क्योंकि होलिका को वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकेगी. कहा जाता है कि प्रहलाद को अपनी असीम भक्ति का फल मिला और होलिका को अपनी कुटिलता की कीमत चुकानी पड़ी- मतलब आग में होलिका तो जल गई, प्रहलाद बच गया.
 
बिहारी होली 
बिहार में होली का अपना एक अलग ही अंदाज है. यहां होली के मौके पर फगुआ और जोगिरा गाने का रिवाज है. साथ ही कई स्थानों पर कीचड़ की होली भी इस पर्व को खास बनाती है. इसके अलावा होली की खुशी में यहां के लोग इस दिन जमकर भांग भी चढ़ाते हैं दिल खोलकर डांस करते हैं. साथ ही बिहार की कुर्ता फाड़ होली भी बहुत फेमस है.