नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को ‘देश के सबसे खतरनाक राजनेता’ बताते हुए इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने कहा कि भारत में बढ़ते हिन्दू राष्ट्रवाद के खिलाफ सर्तक रहने की जरूरत है. रामचंद्र गुहा ने ये बातें साहित्योत्सव ‘स्प्रिंग फीवर 2016’ के शुरुआती सत्र में समकालीन इतिहास की चुनौतियों पर दिए गए अपने संबोधन में कही. पांच दिवसीय यह आयोजन इंडिया हैबिटेट सेंटर में पेंगुइन बुक्स, इंडिया की ओर से किया गया है. गुहा ने कहा कि देश ने बंटवारे के बाद और रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान हिन्दू राष्ट्रवाद के उभार को देखा है.
 
‘हिन्दू राष्ट्रवाद का उभार देश के लिए नया नहीं’
गुहा ने कहा, “हिन्दू राष्ट्रवाद का उभार देश के लिए नया नहीं है. यह बंटवारे के ठीक बाद भी उभरा और रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान भी नजर आया था और दोनों का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने किया था. इसने देश की सांस्कृतिक, धर्मनिरपेक्ष और राजनैतिक बुनावट को गहरा नुकसान पहुंचाया. मुझे आशा है कि अब स्थिति उस हद तक नहीं बिगड़ेगी.” 
 
‘हिन्दू कट्टरवाद इस्लामी आतंकी से ज्यादा खतरनाक’
गुहा ने कहा कि भारत में हिन्दू कट्टरवाद, इस्लामी आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक है. उन्होंने कहा, “इसका कारण यह है कि भारत में 85 फीसदी हिन्दू हैं. मैं हिन्दू बहुसंख्यकवाद के विचार से घबरा रहा हूं, क्योंकि हम ऐसे नहीं हैं.” उन्होंने साथ ही कहा कि वैश्विक परिदृश्य के संदर्भ में इस्लामी आतंकवाद खतरनाक परिघटना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में यद्यपि हिन्दू कट्टरवाद कुछ ही प्रांतों तक सीमित है. 
 
‘खतरनाक राजनीतिज्ञ- अमित व आजम खान’
गुहा ने कहा, “इसने कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को प्रभावित नहीं किया है. लेकिन, उत्तर प्रदेश में इसका चलन डराने वाला है क्योंकि यह एक बड़ा राज्य है और यहां ऊंचे दाव लगे हैं. और, भारत में दो सबसे खतरनाक राजनीतिज्ञ हैं- अमित शाह और आजम खान.”
 
‘BJP बुद्धिजीवी पैदा करने में नाकाम’
उन्होंने देश में रूढ़िवादी बुद्धिजीवियों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बीजेपी दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी पैदा करने में नाकाम रही है. उन्होंने बीजेपी को बुद्धिजीवी विरोधी पार्टी बताते हुए कहा कि गोलवकर एक सामान्य किस्म के धर्माध थे. उन्होंने आरएसएस को ‘निम्न स्तर के विचारकों’ का गुच्छा बताते हुए कहा, “बीजेपी सबसे बड़ी बुद्धिजीवी विरोधी पार्टी है. वे गुजरात में इतने सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद एक भी बुद्धिजीवी पैदा करने में नाकाम रहे हैं. आपके पास अनुपम खेर, प्रवीण तोगड़िया और स्मृति ईरानी जैसे प्रवक्ता नहीं होने चाहिए, जो बहस को और अधिक कीचड़ में ढकेलने की क्षमता रखते हैं. जब तक आरएसएस की राजनीतिक व्यवस्था में भूमिका बनी रहेगी, तब तक दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी पैदा होना नामुमकिन है और हमें दक्षिणपंथी विचारक ही मिलते रहेंगे.” 
 
‘JNU मामला चिंताजनक’
गुहा ने इसके अलावा शोधार्थियों और यूनिवर्सिटी पर किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि जेएनयू मामले में जो कुछ हो रहा है, वह चिंताजनक है. उन्होंने इंडिया ऑफ्टर गांधी, मेकर्स ऑफ मॉडर्न इंडिया, पैट्रियॉट एंड पार्टिजंस और गांधी बिफोर इंडिया आदि किताबें लिखी हैं. उनकी नई किताब ‘डेमोक्रेट्स एंड डिसेंटर्स’ अक्टूबर में मार्केट में आएगी.
 
‘दोबारा आ गया है हिटलर’
गुहा ने इस मौके पर जोर देकर कहा कि उदारवाद, संवाद और सुलह-सफाई ने भारतीय लोकतंत्र को बचाकर रखा है और आगे भी इसे यही बचाकर रखेंगे. हमें उदारवादी होने की भी जरूरत पड़ती है. किसी भी समस्या को समझने और उससे निजात पाने के लिए हमें शांत मन और ठंडे दिमाग की जरूरत होती है. हमें यह नतीजा नहीं निकाल लेना चाहिए कि कोई हिटलर है या आपातकाल दोबारा आ गया है.