नई दिल्ली. राजद्रोह कानून की विधि आयोग समीक्षा कर रहा है और गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे पर उससे जितनी जल्द संभव हो रिपोर्ट देने को कहा है. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा को यह जानकारी दी. रिजिजू ने राज्यसभा में यह भी स्वीकार किया कि राजद्रोह के मामलों में अक्सर पाया जाता है कि बोलने की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है.
 
राजद्रोह कानून के प्रावधान बहुत व्यापक हैं. जो कोई भी सरकारी व्यवस्था के खिलाफ बोलता है, उसे कानूनी तौर पर राजद्रोह कानून के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है. गृह मंत्रालय इस कानून की समीक्षा की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए लिखता रहा है. साल 2012 में भी इसके लिए विधि आयोग से आग्रह किया गया था. 
 
उन्होंने कहा, ‘सरकार के विरुद्ध बोलने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ राजद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. संशोधनों के सुझाव दिए गए हैं, क्योंकि परिभाषा काफी व्यापक है… बहुत तरह के मामले हैं. इसी कारण से चिंताएं जताई गई हैं. मैं चाहूंगा कि विधि आयोग बहुत व्यापक समीक्षा करे.’
 
रिजिजू ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देते हुए कहा कि देश में साल 2014 में राजद्रोह के कुल 47 मामले दर्ज किए गए. इनमें सबसे अधिक 16 मामले बिहार में दर्ज किए गए, जिनमें 28 लोगों की गिरफ्तारियां की गई. उन्होंने कहा कि दूसरे सबसे अधिक मामले झारखंड में दर्ज किए गए. इसके बाद केरल एवं ओड़िशा का स्थान है.
 
गुलाम नबी आजाद ने क्या कहा?
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राजद्रोह की व्यापक परिभाषा होने के कारण सरकार के खिलाफ बोलने के कारण देश के आधे से अधिक राजनीतिक दल राष्ट्र विरोधी हो जाएंगे. उन्होंने सवाल किया गया कि देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के प्रयास करने वालों को भी क्या राजद्रोह कानून के दायरे में लाया जाएगा.
 
राजनाथ ने क्या उत्तर दिया?
इस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हम विपक्ष के नेता के इस विचार से शत प्रतिशत सहमत हैं कि सांप्रदायिक आधार पर बांटने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. मैं सभी राज्य सरकारों से सांप्रदायिक आधार पर बांटने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की आपील करता हूं.’