नई दिल्ली. देशद्रोही नारेबाजी करने की वजह से जेल में बंद छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य की रिहाई को लेकर जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की अगुवाई में एक मार्च निकाला गया. यह मार्च मंडी हाऊस से पार्लियामेंट तक निकाला गया है जिसमें केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ नारेबाजी की गई. छात्रों की रिहाई के लिए निकाले गए इस मार्च ‘फॉर जस्टिस एंड डेमोक्रेसी’ में मश्हूर राइटर अरुंधति राय भी शामिल हुईं.  
 
कैंपस से निकाले जाने पर कन्हैया का जवाब
जेएनयू से निकाले जाने के मामले पर कन्हैया ने कहा है कि उसे यूनिवर्सिटी से निकाले जाने का कोई नोटिस नहीं मिला है. इससे पहले सोमवार को यह खबरें आई थीं कि जेएनयू में 9 फरवरी को हुई देशविरोधी नारेबाजी के मामले की जांच कर रही पांच मेंबर्स की कमेटी ने कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और दो अन्य को यूनिवर्सिटी से निकालने की सिफारिश की है.
 
उमर, अनिर्बान की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी
इस बीच जेल में बंद उमर खालिद और अनिर्बान की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है. वहीं जानकारी के अनुसार उमर और अनिर्बान के खिलाफ देशद्रोह के मामले में कार्रवाई करने और मामले की IB से जांच कराने वाली एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी.
 
क्या मामला था?
12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को राजद्रोह और आपराधिक साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. यह मामला जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रविरोधी नारेबाजी को लेकर दर्ज किया गया था. बाद में उमर और अनिर्बान ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया था और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.