नागौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 91 साल के इतिहास में बड़ा बदलाव हुआ है. आरएसएस के महासचिव भैयाजी जोशी ने बताया कि अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नई ड्रेस में खाकी हाफ पैंट की जगह भूरे रंग की फुल पैंट को जगह दी गई. रंग को लेकर भैयाजी जोशी ने कहा कि इसके चुनने के पीछे कोई कारण नहीं है.
 
उन्होंने कहा, “हमारा संगठन वक़्त के साथ बदलता रहता है, हम कोई जड़ संस्था नहीं हैं.” जोशी ने कहा, “कोई भी जड़ संगठन इतनी प्रगति नहीं कर सकता, जितनी हमने की है. इसलिए हमने इस बदलाव की घोषणा की है.” साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में संगठन ने काफी प्रगति की है और युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाई है. 
 
JNU मामले पर बोले भैयाजी
जेएनयू मामले में बोलते हुए भैयाजी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा. देश विरोधी नारे लगाने वालों पर बोलते हुए कहा कि उनका कुछ नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि चाहे देश की कोई भी सरकार हो इस तरह से देश के टुकड़े करने वालों को कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता. उन्होंने सवाल किया, “ये एक गंभीर विषय है और ऐसी मानसिकता को क्या माना जाए?”
 
 
शनि मंदिर पर बोले भैयाजी 
शनिशिंगणा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में भैया जी ने कहा, अब मानसिकता बदल गई है. महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. पूजा पाठ में भी संन्यासी महिलाएं बन रही हैं और इसका पुराना इतिहास भी रहा है. अगर कहीं कोई प्रथा गलत चल पड़ी है तो इसको बदलने के लिए उग्र होने के बजाए शांतिपूर्वक विचार करने से ठीक होगा.
 
‘आजाद अभी अज्ञान हैं’
जोशी ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की आरएसएस की तुलना इस्लामिक स्टेट से करने वाले बयान की भी तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा, “गुलाम नबी आजाद ने हमारे बारे में जो भी कहा उससे उनकी अज्ञानता झलकती है.”
 
2010 में बदलाव का आया मुद्दा
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने बताया था कि 2010 में वर्दी में बदलाव का मुद्दा एक बैठक में उठाया गया था, लेकिन आम सहमति न बन पाने के कारण इसे 2015 तक टाल दिया गया था. आरएसएस के सदस्य अभी खाकी हाफ पैंट और पूरी बांह वाली सफेद कमीज पहनते हैं जो कुहनी तक मुड़ी रहती है. अपने ‘गणवेश’ के तहत वे काली टोपी भी लगाते हैं.