धर्मशाला. बाल्टिक देशों के सांसदों के समूह ने चीन से आग्रह किया है कि वह तिब्बत की अर्थपूर्ण स्वायत्तता के लिए दलाई लामा के दूतों से वार्ता शुरू करें. यह जानकारी यहां स्थित मध्य तिब्बती प्रशासन (सीटीए) से मिली. सीटीए ने कहा कि एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के सांसदों ने कहा कि चीन के शासन में तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. चीनी शासन के विरोध में तिब्बत और उसके बाहर तिब्बतियों की आत्मदाह की बढ़ती घटनाओं पर सांसदों ने गहरी चिंता भी जताई.
 
सीटीए के अनुसार सांसदों ने कहा, “इसलिए हम लोग चीनी सरकार से आग्रह करते हैं कि वह दलाई लामा और सीटीए के साथ तुरंत अर्थपूर्ण वार्ता शुरू करे, दोनों ही चीनी गणराज्य के अधीन तिब्बत में अर्थपूर्ण स्वायत्तता को अंगीकार करने के लिए तैयार हैं.”
 
सांसदों ने कहा कि चीनी सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में 2009 से लेकर अब तक 143 तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं. सांसदों ने कहा कि इस समस्या के चिरकालिक हल के लिए निर्वासित तिब्बती नेतृत्व और चीनी सरकार के बीच अर्थपूर्ण वार्ता शीघ्र शुरू करने में मदद देने के लिए वे तैयार हैं.
 
उन्होंने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में एस्टोनिया, लिथुआनिया और लातविया का तिब्बत जैसा ही भाग्य और इतिहास रहा है. सांसदों ने कहा, “हम लोगों के पास वैसा अनुभव है जो चीन-तिब्बत वार्ता को सुगम बना सकता है.”
 
इस बीच 57वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के अवसर पर तिब्बत के निर्वाचित प्रतिनिधि लोबसांग सांगे ने कहा कि तिब्बती नेतृत्व अहिंसा के लिए प्रतिबद्ध है और इस समस्या का हल वार्ता के जरिए चाहता है. 2002 से अब तक दलाई लामा के दूतों और चीन के बीच नौ चक्र की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल नहीं हुई है. पिछली वार्ता 2010 में हुई थी. दलाई लामा ने 1959 में तिब्बत छोड़ दिया था. वह तभी से भारत में रह रहे हैं.