नई दिल्ली. दिल्ली में यमुना तट पर होने वाले श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम पर उठे विवाद को लेकर एनजीटी ने इस मामले में डीडीए को कड़ी फटकार लगाई है. यमुना किनारे मलबा इकट्ठा होने को लेकर एनजीटी के सवाल पर डीडीए ने कहा कि उन्हें मलबे से जुड़ी जानकारी नहीं है. इसपर एनजीटी ने कहा कि डीडीए खुद को बचाने की कोशिश कर रही है.

एनजीटी ने डीडीए से पूछा कि आपकी तरफ से तय की गई शर्तों पर क्या आयोजन हो रहा है. इस पर डीडीए ने एनजीटी से कहा कि केवल करीब 24 हेक्टेयर जमीन के लिए आयोजन के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है. डीडीए ने कहा कि नियमों का उल्लंघन है या नहीं ये वो नहीं कह सकता, ये आर्ट आफ लिविंग बताएगा.

एनजीटी ने डीडीए से कहा कि यमुना किनारे मलबा हटाने के लिए डीडीए को एनजीटी के किसी आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए, उसे खुद मलबा हटाना चाहिए था. ये मलबा वही था जिसे आर्ट ऑफ लिविंग ने आयोजन से पहले डीडीए से हटाने को कहा था. डीडीए ने कहा कि कोई मलबा नहीं था, अगर हम गलत हैं तो हम मुक़दमे का सामना करने को तैयार हैं.

इससे पहले डीडीए ने कहा कि कार्यक्रम को इजाजत नियमों के तहत दी गई है और इस तरह के आयोजन की मांग जनता हमेशा करती रहती है. यमुना तट पर होने वाले श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम में 35 लाख लोगों के आने की संभावना है. यमुना नदी पर होने वाले इस कार्यक्रम में लोगों को मुश्किल न हो इसके लिए सेना पॉन्टून का पुल भी बना रही है.

श्री श्री रविशंकर की संस्था वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल का आयोजन आर्ट आफ लिविंग ने अपनी स्थापना के 35 साल पूरे होने के अवसर पर किया है. लेकिन पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख दिखाया है.