नई दिल्ली. इशरत जहा केस की जांच के लिए गुजरात हाईकोर्ट के ऑर्डर पर बीनी एसआईटी की टीम में अफसर रहे सतीश वर्मा का दावा है कि इशरत एनकाउंटर में नहीं मारी गई, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ उसका मर्डर किया गया था.

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में वर्मा ने कहा कि हमारी जांच में पता लगा कि इशरत और उसके साथियों को इंटेलिजेंस ब्यूरो ने कथित एनकाउंटर के कई दिन पहले ही उठा लिया था. सच्चाई ये है कि आईबी की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं था कि आतंकियों के साथ कोई महिला भी है.

वर्मा ने कहा कि इशरत के बारे में कोई इनपुट नहीं था. इन लोगों को गैरकानूनी तरीके से कस्टडी में रखा गया और बाद में मार दिया गया.एक बेगुनाह लड़की के बारे में राष्ट्रवाद और सिक्युरिटी से जोड़कर तर्क दिए जा रहे हैं. इसके जरिए कुछ लोग खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

वर्मा ने आगे कहा कि इशरत जावेद शेख के संपर्क में आने से केवल 10 दिन पहले घर से गायब हुई थी. लश्कर आतंकियों को सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए लंबा वक्त लगता है. थ्री नॉट थ्री राइफल को ठीक से चलाने के लिए भी कम से कम 15 दिन लगते हैंय इतने वक्त तो इशरत घर से बाहर रही ही नहीं. फिर वो फिदायीन कैसे हो सकती है ?

पिल्लई के दावों को भी खारिज किया

वर्मा ने पूर्व होम सेक्रेटरी जी.के. पिल्लई के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उन्हें इशरत मामले की पूरी जानकारी थी. वर्मा ने कहा कि मैं कोई इंटेलिजेंस अफसर नहीं हूं.

वर्मा ने होम मिनिस्ट्री के पूर्व अफसर आरवीएस मणि को सिगरेट से दागने और टॉर्चर करने के दावों को भी नकारते हुए कहा कि मणि को तो इस केस की कोई सीधी जानकारी थी ही नहीं.

बता दें कि होम मिनिस्ट्री के रिटायर्ड अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि का आरोप है कि इशरत केस में एफिडेविट बदलने और उसे आतंकी न बताने का उन पर दबाव था. वर्मा ने उन्हें सिगरेट से दागा था. सीबीआई उनका पीछा करती थी.