नई दिल्ली. जेएनयू परिसर में कथित तौर पर भारत-विरोधी नारे लगाने के चलते देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को छह महीने की अंतरिम जमानत मिल गई है.
 
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने कन्हैया को 10 हजार रुपये का निजी मुचलका जमा करने के लिए कहा. जानकारी के अनुसार कन्हैया की रिहाई कल यानि गुरुवार को हो सकती है.
 
जमानत याचिका में क्या लिखा ?
जमानत याचिका में कन्हैया की ओर से कहा गया कि वह बेगुनाह है. पुलिस को अब हिरासत की जरूरत नहीं है. रिपोर्ट कहती है कि उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं. उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलने से पहले ही उनसे गुनाहगार जैसा बर्ताव किया गया.
 
पटियाला हाउस में उसे पीट-पीटकर मार डालने की कोशिश की गई. उसके अधिकारों का हनन किया गया. कन्हैया ने जेल में भी खुद की जान का खतरा बताया है.
 
याचिका में यह भी लिखा गया था कि पटियाला हाउस कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सुरक्षा नहीं हो पाई. वहां उसे फेयर ट्रायल नहीं मिलेगा. इसलिए ऐसे हालात में सुप्रीम कोर्ट जमानत दे. 
 
क्या है मामला ?
9 फरवरी को जेएनयू में द ‘कंट्री विदाउट ए पोस्ट ऑफिस’ नाम से एक विरोध मार्च का आयोजन किया गया था. जेएनयू के गंगा ढाबा से शुरू हुए इस विरोध मार्च में आतंकी अफजल गुरु और मकबूल भट की फांसी को न्यायिक हत्या बताया गया. इस दौरान आतंकियों के समर्थन और कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग को लेकर नारेबाज़ी की गई.