नागपुर. जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारों के मुद्दे को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक गलियारे में काफी उठा-पटक मची हुई हैं वहीं इस बीच एक शहीद की पत्नी का दर्द भी सामने आया है. सियाचिन में बर्फ के कफन में 6 दिन जिंदा रहने वाले जांबाज सैनिक लांस नायक हनुमनथप्पा की पत्नी महादेवी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि वह देश विरोधी नारे न लगाएं और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल न होने हों.
 
नागपुर में एक कार्यक्रम में महादेवी ने कहा कि देश में हालिया राष्ट्र विरोधी गतिविधि की खबरें सुनाई देना दुखद है. उन्होंने कहा कि युवाओं को देश के लिए प्राण न्यौछावर करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.
 
‘शहीदों की शहादत का मत करो अपमान’
महादेवी ने कहा कि देश के खिलाफ बयानबाजी कर शहीदों की शहादत का अपमान तो मत करो. वो देश के कई विश्वविद्यालयों में लग रहे राष्ट्रविरोधी नारों से दुखी है. महादेवी ने यह भी कहा कि मेरा बेटा तो नहीं है लेकिन अपनी बेटी को मैं बेटे की तरह बड़ा करूंगा और सेना में भेजूंगी. 
 
‘राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के बारे सुन कर दुख पहुंचा’
इसके अलावा महादेवी ने शहीद हनुमनथप्पा को याद करते हुए कहा कि कहा कि मेरे पति सेना में जाना चाहते थे. वह पुलिस के लिए चुन लिए गए थे लेकिन वह सेना में गए. मैंने देश में चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के बारे में सुना है. इससे मुझे दुख पहुंचा है. हम भारत में पैदा हुए हैं और भारत माता ने अपनी सरजमीं हमें रहने के लिए दी है लेकिन हम उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही यह भी कहा कि युवा ऐसा बिल्कुल न करें. हमें अपनी जिंदगी देश के लिए देने के लिए तैयार रहना चाहिए.
 
11 फरवरी को हनुमंथप्पा ने ली थी आखिरी सांस 
बता दें कि डॉक्टरों की लाख कोशिशों और देश के सभी लोगों की प्रार्थनाओं के बावजूद सियाचिन के बर्फ में मौत को मात देने वाले जांबाज जवान हनुमंथप्पा को नहीं बचाया जा सका था.  हनुमंथप्पा ने 11 फरवरी को दिल्ली के आर्मी अस्पताल में आखिरी सांस ली थी. हनुमंथप्पा की मौत एक साथ कई अंगों के काम नहीं करने की वजह से हुई थी.