चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने आरक्षण को लेकर दंगा प्रभावित इलाकों में अफसरों के विरुद्ध सरकार का सफाई अभियान शुरु हो गया है. इस मामले में पहली गाज रोहतक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और रोहतक के पूर्व आईजीपी श्रीकांत जाधव और दो डीएसपी पर गिरी.
 
हरियाणा सरकार ने इन तीनों को रोहतक में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा नियंत्रित करने में कर्तव्यों का ठीक तरीके से निर्वहन नहीं के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है. इस मामले में जानकारी देते हुए हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) पी के दास ने कहा कि रोहतक के पूर्व आईजी श्रीकांत जाधव और रोहतक के दो डीएसपी अमित दहिया और अमित भाटिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. 
 
फोर्स को किया अपनी कोठी पर तैनात
आंदोलनकारियों ने रोहतक आईजी रहे जाघव की कोठी का घेराव कर दिया था. जिसे लेकर उन पर आरोप लगे हैं कि अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने पुलिस फोर्स को अपनी कोठी पर तैनात कर लिया. बता दें कि इससे पहले इनका तबादला मधुबन में स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आइजी पद पर किया जा चुका है.
 
ड्यूटी सही से नहीं निभाने का आरोप
वहीं डीएसपी रहे अमित भाटिया और अमित दहिया पर रोहतक में जाट आंदोलन को हिंसक रुप दिलाने में सहयोग के आरोप है. सूत्रों की मानें तो भाटिया ने कुछ पुलिस जवानों को साथ लेकर शहर के एक कॉलेज में कुछ विद्धार्थियों की पिटाई की थी. इसके अलावा इन दोनों अधिकारियों पर ड्यूटी सही से नहीं निभाने के आरोप भी लग रहे हैं.
 
कई और अफसरों की बढ़ी मुश्किलें
इसके अलावा सरकार ने विभिन्न एचसीएस अफसरों का तबादला करते हुए कैथल में आरक्षण की वकालत करने वाली एसडीएम मनदीप कौर का भी तबादला तो कर दिया. लेकिन उन्हें कोई अन्य पद न सौंपते हुए प्रतीक्षा सूची में डाल दिया है. साथ ही मेहम, रोहतक और गोहाना के डीएसजी के सुरेंद्र सिंह, सुखबीर सिंह और विनोद कुमार का भी फेरबदल किया गया है. जिसके बाद ये साफ हो चुका है कि इस मामले को लेकर कई और अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं.