नई दिल्ली. जवाहर लाल विश्वविद्यालय में हर साल होने वाले महिषासुर इवेंट में शामिल होने की बात को बीजेपी सासंद उदित राज ने स्वीकार लिया है. उनका कहना है कि हां मैं इवेंट में शामिल हुआ था लेकिन बात 2013 की है और उस समय मैं बीजेपी का सदस्य नहीं था. साथ ही वहां जाने का मेरा मकसद बाबा साहेब अंबेडकर पर विचार रखने के लिए गया था. 
 
उदित ने खुदको बाबा साहब अंबेडकर के विचारों का पालन करने वाला बताया. उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहब अंबेडकर भी क्या अब अपने इन विचारों के लिए आकर माफी मांगे? 
 
उन्होंने दो टूक कहा कि बीजेपी में शामिल होने के बाद वह इस आयोजन में नहीं गए थे. उदित ने यह भी कहा कि स्मृति ईरानी ने किस संदर्भ में इस आयोजन का जिक्र किया यह उन्हीं से पूछा जाए.
 
ईरानी ने क्या बोला था संसद में?
 
स्मृति ईरानी ने संसद में बहस के दौरान महिषासुर दिवस के आयोजन का एक पर्चा पढ़कर सुनाया था. उन्होंने कहा कि ‘ मुझे ईश्वर माफ करें इस बात को पढ़ने के लिए. इसमें लिखा है कि दुर्गा पूजा सबसे ज्यादा विवादास्पद और नस्लवादी त्योहार है. जहां प्रतिमा में खूबसूरत दुर्गा मां को काले रंग के स्थानीय निवासी महिषासुर को मारते दिखाया जाता है.
 
महिषासुर एक बहादुर, स्वाभिमानी नेता था, जिसे आर्यों द्वारा शादी के झांसे में फंसाया गया. उन्होंने एक सेक्स वर्कर का सहारा लिया, जिसका नाम दुर्गा था, जिसने महिषासुर को शादी के लिए आकर्षित किया और 9 दिनों तक सुहागरात मनाने के बाद उसकी हत्या कर दी. स्मृति ने गुस्से से तमतमाते हुए सवाल किया कि क्या ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है? कौन मुझसे इस मुद्दे पर कोलकाता की सड़कों पर बहस करना चाहता है?