नई दिल्ली. यूपीए सरकार में गृह और वित्त मंत्रालय संभालने वाले पी. चिदंबरम का अफजल गुरु पर एक बड़ा बयान आया है. चिदंबरम का कहना है कि मुझे लगता है अफजल की फांसी पर फैसला ठीक से नहीं हुआ इसके अलावा चिदंबरम ने यह भी कहा कि इस बात पर गहरा संशय है कि 2001 में संसद पर हमले की साजिश में अफजल किस हद तक शामिल था.
 
‘मैं गृह मंत्री नहीं था’
अफजल गुरु को तीन साल पहले संसद हमले को लेकर दोषी करार देते हुए यूपीए सरकार के दौरान ही फांसी दी गई थी. हालांकि जब चिदंबरम को यह कहा गया कि अफजल की फांसी तभी हुई थी जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने कहा कि हां यह सच है लेकिन उस समय मैं गृह मंत्री नहीं था, मैं नहीं कह सकता कि उस समय क्या करना था. उन्होंने कहा कि निर्णय लेना तभी संभव है जब आप कुर्सी पर बैठे हों.
 
‘केस में नहीं लिया गया सही फैसला’
एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में चिदंबरम ने कहा कि यह ईमानदार राय रखना मुमकिन है कि अफजल गुरू केस में शायद सही ढंग से फैसला नहीं किया गया. चिदंबरम ने आगे कहा कि सरकार में रहते हुए आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने गलत फैसला किया क्योंकि केस तो सरकार ने ही चलाया था. लेकिन एक आजाद शख्स यह राय तो रख ही सकता है कि इस केस में सही तरीके से फैसला नहीं लिया गया.
 
JNU के आरोपी छात्रों का किया बचाव
इसके अलावा चिदंबरम ने जेएनयू मुद्दे पर आरोपी छात्रों का बचाव करते हुए कहा कि यह अपमानजक है और अदालत पहली सुनवाई में ही इन आरोपों को खारिज कर देगी. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से बोलना देशद्रोह नहीं है. चिदंबरम का कहना है कि आपकी बातें तभी देशद्रोही होती हैं जब इनसे बारूद के ढेर में आग लग जाए. उन्होंने आगे कहा कि जेएनयू में लगाए गए नारे देशद्रोह नहीं है. इस उम्र में छात्रों को गलत होने का हक होता है और यूनिवर्सिटी ऐसी जगह है जहां आप हमेशा गंभीर नहीं हो सकते कई बार आप हास्याोस्पद भी हो सकते हैं.