नई दिल्ली. जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने के आरोपी कन्हैया कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई हाईकोर्ट में टल गई है. याचिका पर अगली सुनवाई 29 फरवरी को होगी. दिल्ली पुलिस कन्हैया को रिमांड पर लेकर वह उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य के साथ कन्हैया को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर सके. वहीं हाईकोर्ट ने पुलिस को दोबारा रिमांड पर मांगने की इजाजत देते हुए कहा कि यह उनका अधिकार है कि वे दोबारा पुलिस हिरासत की मांग कर सकती है. 
 
‘सुरक्षा की वकीलों को दें जानकारी’
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के पास जा सकती है. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस रिमांड 15 दिनों के भीतर ही ले सकती है. जिसमें अब तीन दिन ही बचे हैं. हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि रिमांड के लिए सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए जाएं. पुलिस ये भी सुनिश्चित करे कि रिमांड अर्जी और सुनवाई से पहले कन्हैया के वकीलों को जानकारी दी जाए. इस पर कन्हैया के वकील कपिल सिब्बल और रेबेका जॉन ने न्यायालय से कहा कि वे पुलिस रिमांड आवेदन का विरोध करेंगे.
 
कन्हैया की जमानत याचिका में क्या लिखा ?
जमानत याचिका में कन्हैया की ओर से कहा गया कि वह बेगुनाह है. पुलिस को अब हिरासत की जरूरत नहीं है. रिपोर्ट कहती है कि उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं. उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलने से पहले ही गुनाहगार जैसा बर्ताव किया गया. पटियाला हाउस में उसे पीट-पीटकर मार डालने की कोशिश की गई. उसके अधिकारों का हनन किया गया. कन्हैया ने जेल में भी जान का खतरा बताया है.  
 
याचिका में यह भी लिखा गया था कि पटियाला हाउस कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सुरक्षा नहीं हो पाई. वहां उसे फेयर ट्रायल नहीं मिलेगा. इसलिए ऐसे हालात में सुप्रीम कोर्ट जमानत दे.   
 
क्या है मामला?
बता दें कि पुलिस ने देशद्रोह के आरोप में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को गिरफ्तार किया है. पुलिस को इस मामले में 7 से 8 लोगों की तलाश है. मंगलवार को जेएनयू परिसर में छात्रों के एक समूह ने एक समारोह आयोजित किया था और संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को साल 2013 में फांसी दिए जाने के मुद्दे पर सरकार और देश के खिलाफ नारे लगाए थे.