वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. उनके साथ कार्यक्रम में मानव संसाधन विकास मंत्री स्‍मृति ईरानी भी मौजूद रहीं. विद्यार्थियों को उपाधियां देने के बाद पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह दीक्षांत समारोह नहीं बल्कि शिक्षा के आरंभ का समारोह है.
 
‘दोनों ने देश के लिए योगदान दिया’
मोदी ने कहा कि महामना मदन मोहन मालवीय ने जो बीएचयू में किया, वहीं महात्मा गांधी ने बाद में गुजरात विद्यापीठ में किया. ये दोनों महापुरुष युवाओं को यह पाठ पढ़ाना चाहते थे कि किस तरह देश के लिए योगदान दिया जाए. यह शिक्षा के अंत का नहीं वरन शिक्षा से प्राप्‍त गुर को आजमाने का आरंभ है. हमारे अंदर का विद्यार्थी कभी मरना नहीं चाहिए. वही जिंदा रहता है जो आजीवन विद्यार्थी रहता है.
 
‘विशाल विश्व है आपके सामने’
मोदी ने कहा कि आज जब हम इस दीक्षांत से निकल रहे हैं तो हमारे सामने एक विशाल विश्‍व है. अब आप कैंपस से निकलकर दुनिया में कदम रख रहे हैं. एक ओर खुशी होती है, लेकिन अब परिसर से निकलते ही मुझे देखने का दुनिया का नजरिया बदल जाएगा. मन में यह भाव रखना होगा क्‍योंकि अब लोग पूछेंगे कि बताओ भैया अब क्‍या करोगे. ऐन यहीं से जिंदगी की कसौटी का आरंभ हो जाएगा. 
 
‘जीवन कभी नहीं मुरझाए’
मोदी ने कहा कि दीक्षांत समारोह एक नई प्रेरणा का अवसर भी होता है. जिज्ञासा की जड़ों को अब और मजबूत करते चलिए. यह मुरझाई तो नित नूतन करने का आनंद ही नहीं ले पाएंगे. जीवन कभी मुरझाना नहीं चाहिए. जीवन खिला रहना चाहिए. संकट के सामने भी उसे झेलने का सामर्थ्‍य होना चाहिए. तात्‍कालिक चीजों से जो घबरा जाता है, उसके लिए ज्ञान का प्रकाश ही पथ बनाता है. 
 
‘अपनी भूमिका को पहचानें’
मोदी ने कहा कि देश-दुनिया के सामने बेहद चुनौतियां हैं. उनके बीच में आपकी भूमिका क्‍या हो, इसे तलाशें. समझें कि मैं कुछ ऐसा कर जाऊं कि लोग युगों तक याद रखें. नए-नए अनुसंधान के बारे में सोचें, महज डिग्री के लिए पढ़ने का क्‍या मतलब है. आदिवासी क्षेत्रों में कई गंभीर बीमारियां फैली हैं, क्‍या निदान का कोई उपाय हम खोज सकते हैं?
 
दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से बचाएं
ग्लोबल वार्मिग को लेकर उन्होंने कहा कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है. पूरी दुनिया पेरिस में जुटी थी, दो डिग्री तापमान कम करना है वरना न मालूम कितने आइलैंड डूब जाएंगे. हम ये चुनौती स्‍वीकार कर सकते हैं. हमारे भीतर तमाम तत्व ज्ञान है, हम दुनिया को परिवार और ब्रह्मांड को कुनबा मानते हैं. हम सूरज को दादा और चांद को भी मामा कहते हैं. हम दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए कोई ठोस रास्ता दिखा सकते हैं?
 
‘भारत 122 देशों का अध्यक्ष’
पीएम बोले प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं, संवाद होना चाहिए. हम अमेरिका, भारत, फ्रांस व बिल ग्रेट्स एक साथ इस मामले पर काम कर रहे हैं. पहली बार दुनिया के सूर्य से आशीर्वाद प्राप्‍त 122 देशों का संगठन बना है, भारत जिसका अध्यक्ष है. तो हमारी जिम्मेदारी भी बड़ी है. हमारे गन्ना किसान भी परेशान हैं. बीएचयू इस दिशा में कुछ कर सकता है? क्या सोलर एनर्जी की दिशा में हम कुछ कर सकते हैं? मैं बीएचयू के होनहारों को चुनौती देने आया हूं – आईए, सपने बड़े देखिए. दुनिया के लिए कुछ करिए.