नई दिल्ली. मुंबई में आज बीसीसीआई ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर चर्चा करने के लिए स्पेशल जनरल मीटिंग बुलाई थी. बैठक में जब डीडीसीए ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को मानने से मना किया तो मामला और गंभीर हो गया. बीसीसीआई की स्पेशल जनरल मीटिंग में कई ऐसे फैसले हुए, जिससे टकराव की स्थिति को टाला जा सके और बीच का रास्ता निकाला जा सके.

अब बीसीसीआई सचिव सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे. हलफनामे में बीसीसीआई उन मुद्दों पर जोर देगी, जिनमें जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें मानना संभव नहीं है. बैठक में छत्तीसगढ़ को पूर्ण सदस्यता दे दी गई है और अब वह सेंट्रल जोन का हिस्सा होगा और उसकी टीम बीसीसीआई के तमाम टूर्नामेंट खेल पाएंगी.

वर्किंग कमेटी ने अध्यक्ष और सचिव को सीईओ और सीएफओ के पद के लिए उपयुक्त प्रतिभागियों की खोज के लिए एजेंसी नियुक्त करने के लिए अधिकृत किया है. सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई की पूरी कोशिश यह रहेगी कि वो सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसी छवि पेश न करे कि वह जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को मानने के पक्ष में नहीं है.

बीसीसीआई अपनी दलीलों के द्वारा ये कहना चाहेगा कि कुछ सुझाव मानने से खेल के भविष्य पर खतरा हो सकता है. बीसीसीआई को एक राज्य को सिर्फ एक वोट का अधिकार और मैच के प्रसारण के दौरन विज्ञापनों पर नियंत्रण जैसे कुछ मुद्दों पर एतराज़ है.

इन दो मुद्दों के अलावा बीसीसीआई लोढ़ा पैनल की सिफारिशों को मानने से गुरेज नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 3 मार्च को है और सबकी नजरें बीसीसीआई के हलफनामे और उस पर सुप्रीम कोर्ट के जवाब पर होगी.