नई दिल्ली. जेएनयू विवाद पर वीडियो का एक अलग खेल शुरू हो गया है. इंडिया न्यूज ने जब कन्हैया का वो वीडियो दिखाया जिसमें वो कह रहा है ‘हमें चाहिए आजादी’ तो इसके बाद कुछ चैनलों ने उसकी आज़ादी का एक दूसरा वीडियो दिखाना शुरू कर दिया. जिसमें वो सामंतवाद और मनुवाद से आज़ादी की मांग कर रहा है.

लेकिन इंडिया न्यूज़ का वीडियो, इस वीडियो से बिल्कुल अलग है. ऐसे में यहां ये समझना ज़रूर हो जाता है कि कन्हैया की आज़ादी का सही मतलब क्या है ? यानि कि उसके नारे के संदर्भ क्या है ? एक ज़िम्मेदार चैनल के तौर पर इंडिया न्यूज़ चार वीडियो रखने जा रहा है और समूचा हिंदुस्तान तय करे कि कन्हैया की आज़ादी का सच क्या है ? पहला वीडियो 9 फरवरी का है. इसमें आपको खालिद कश्मीर की आज़ादी का नारा लगाता हुआ दिख रहा है.

दूसरा वीडियो भी 9 तारीख का ही है जब रात हो जाती है और बवाल बढ़ जाता है. तब खालिद के साथ कन्हैया नज़र आता है. ये वही वक्त है जब ‘हिंदुस्तान तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह’ के नारे लग रहे थे, कश्मीर मांगे आज़ादी के नारे लग रहे थे, ये 9 तारीख के 2 वीडियो हैं.

अब 24 घंटे बाद वही कन्हैया आज़ादी के नारे लगाता है और संदर्भ बदल जाता है. वो कहता है ‘मनुवाद से आज़ादी’, ‘सामंतवाद से आज़ादी’. यहां भी उमर खालिद कन्हैया के साथ खड़ा है. गौर कीजिएगा दोनों वीडियो यानि 9 और 11 तारीख़ के वीडियो में कन्हैया और उमर खालिद साथ-साथ हैं.

अब इंडिया न्यूज़ ने जो वीडियो दिखाया उसमें कन्हैया कह रहा है कि ‘हमें चाहिए आज़ादी’. कुछ चैनल कन्हैया कि इस बात को सामंतवाद और मनुवाद से जोड़कर बता रहे हैं लेकिन इंडिया न्यूज़ का सवाल ये है कि इस आज़ादी का संदर्भ 9 तारीख़ को कश्मीर की आज़ादी की मांग क्यों नहीं हो सकती ? क्यों नहीं ये माना जाए कि 24 घंटे बाद कन्हैया और खालिद ने खुद को बचाने के लिए मनुवाद और सामंतवाद का सहारा लिया और नया नारा गढ़ा ?

वीडियो में देखें पूरा शो