नई दिल्ली. कांग्रेस ने कहा है कि पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों, छात्रों और शिक्षकों पर ‘जघन्य और अमानवीय हमला’ बीजेपी के गुंडों की कारस्तानी है और कहा कि पुलिस इसकी मूकदर्शक बनी रही. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि बीजेपी भारत के युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों, विपक्ष और हर उस व्यक्ति और संगठन की आवाज को दबा रही है जो ‘असहमति के दमन और सरकार की अक्षमता’ पर सवाल उठा रहे हैं.
 
सिब्बल ने कहा, “ऐसे सभी लोगों और संगठनों को बेहद आसानी से ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘नक्सली’ ठहरा दिया जा रहा है. क्या हमें यह दोहराने की जरूरत है कि यही सब कुछ पुणे के एफटीटीआई में किया गया था, जहां विरोध जता रहे छात्रों को नक्सल करार दिया गया था.”
 
उन्होंने आरोप लगाया, “आईआईटी मद्रास के अंबेडकर पेरियार सर्किल के छात्रों को बैन कर दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने नरेंद्र मोदी की आलोचना करने की हिम्मत दिखाई थी. रोहित वेमुला जैसे छात्रों का हैदराबाद केंद्रीय यूनिवर्सिटी में दमन किया गया.” 
 
सिब्बल ने कहा कि बजाए इसके कि जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले मुट्ठी भर लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, पूरे जेएनयू को राष्ट्र विरोधी के तौर पर पेश करने का चिर परिचित व्यवहार दोहराया जा रहा है.
 
बयान में कहा गया, “कांग्रेस सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों, छात्रों और शिक्षकों पर बीजेपी विधायक ओ.पी.शर्मा के नेतृत्व में पार्टी के गुंडों द्वारा किए गए जघन्य और अमानवीय हमलों की निंदा करती है.” 
 
सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस ‘मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई हिंसा की संस्कृति और गुंडागर्दी’ की निंदा करती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने पूछा कि सरकार बीजेपी सांसद साक्षी महाराज जैसे आपत्तिजनक बयान देने वालों पर क्यों नहीं कार्रवाई करती. सिब्बल ने पूछा, “उन लोगों पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने के बारे में क्या राय है, जो जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी नारे लगाते हैं और आईएस और पाकिस्तान का झंडा लहराते हैं?”