नई दिल्ली. सिखों पर बने जोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी DGPC से कहा है कि कोर्ट किस तरीके से इन जोक्स पर रोक लगा सकता है, इसके लिए सुझाव दें.

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक दायरे में किस तरह के आदेश दिए जा सकते हैं, ये एक हफ्ते के भीतर SGPC कोर्ट को बताए. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुझाव ऐसा हो जिस पर आदेश जारी किया जा सके और लोग उस आदेश को मानें.

मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर ये जोक व्यावसायिक गतिविधि के तहत होते तो कोर्ट इन पर रोक लगा सकता था. लेकिन यहां मामला दूसरा है. उन्होंने कहा कि देश की सेना के चीफ सिख थे और अगले चीफ जस्टिस भी सिख होंगे. ऐसे में सवाल ये है कि आपके साथी सिख हैं और कैंटीन में आप उनके साथ मजाक कर हंसते हैं तो क्या आपका साथी इसके लिए आप पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है.

कोर्ट ने कहा कि ये देखना जरूरी है कि इस मामले में किस तरह से कोई न्यायिक आदेश दिए जा सकते हैं जिन पर लोग अमल करें याचिकाकर्ता का कहना था कि लोग सिखों का मजाक उड़ाते हैं जिनकी वजह से सिखों की भावनाएं आहत होती हैं.