नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. लेकिन इस कार्यक्रम में जेएनयू के स्टूडेंट्स आपस में भिड़ गए. इस दौरान हालात को काबू करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा. 
 
रिपोर्ट्स के मुताबकि कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के साबरमती ढाबे पर कार्यक्रम को आयोजित किया था जिसमें वे अफजल गुरु को फांसी देने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. कार्यक्रम का उद्देश्य कश्मीरियों को खुद के फैसले लेने के अधिकार दिए जाने को लेकर आवाज उठाना भी था. कार्यक्रम की मंजूरी तो मिली लेकिन अखिल भारतीय हिंदू परिषद ने मंजूरी वापस करवा दी. 
 
रजिस्‍ट्रार भूपिंदर ज्‍युत्‍शी ने बताया, ”हमने पहले एक सांस्‍कृतिक कार्यक्रम की इजाजत दी थी. हमें टॉपिक के बारे में जानकारी नहीं थी. जब हमें पता चला कि यह अफजल गुरु के लिए है तो हमें मंजूरी वापस लेनी पड़ी. आतंकवादी साबित होने के बाद भारत सरकार ने उसे फांसी की सजा दी. हम उन्‍हें भारत विरोधी कार्यक्रम का आयोजन करने की इजाजत कैसे दे सकते हैं?” 
 
कैसे बढ़ा मामला?
 
एबीवीपी के मंजूरी वापस करवाने की बात बाकी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन( AISA), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) तक पहुंच गई और वे कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए आयोजनकर्ताओं के पास पहुंच गए.
 
इन छात्र संगठनों ने जब गंगा ढाबा से मार्च शुरू किया तो एबीवीपी के सदस्‍यों से उनका आमना-सामना हुआ. इसके बाद, शांति-व्‍यवस्‍था कायम रखने के लिए वसंत कुंज थाने से पुलिस बुलानी पड़ी.