नई दिल्ली. नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. सोनिया-राहुल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पिछले साल 7 दिसंबर के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में इस मामले में 20 फरवरी को दोपहर 2 बजे अगली सुनवाई होनी है.

याचिका में सोनिया गांधी ने उस समन को भी रद्द किए जाने की मांग की है जो 26 जून 2014 को एक निचली अदालत ने जारी किया था. सोनिया ने निचली अदालत में चल रहे इस मामले को भी रद्द करने की मांग की है.

याचिका में सोनिया ने कहा है कि एक राजनैतिक पार्टी से दिया गया चंदा आखिर आपराधिक साजिश के दायरे में कैसे आ सकता है ? वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सभी तथ्यों को नहीं देखा. हाईकोर्ट ने तथ्यों और कानूनी वैधता पर गौर किए बिना ही फैसला सुना दिया.  

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद 19 दिसंबर को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई कांग्रसी नेता पेश हुए थे. नेशनल हेराल्ड मामले में जारी किए गए समन का पालन करने के लिए इन बड़े नेताओं के साथ कांग्रेस का एक बड़ा हुजूम भी अदालत के दरवाजे तक पहुंचा था. सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सभी आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट ने 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी.

यह मामला बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत पर आधारित है जिसमें इन पर धोखाधड़ी, साजिश और आपराधिक विश्वाघात के आरोप लगाए गए हैं. मजिस्ट्रेट ने इन्हें जमानत देते हुए कहा था कि आरोपी जाने-माने लोग हैं और इनके गहरे राजनीतिक आधार है और इनके देश छोड़कर भागने की कोई आशंका नहीं है.

सोनिया और राहुल पर आरोप हैं कि इन्होंने कांग्रेस से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की 2000 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली थी. पहले नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएट जनरल लिमिटेड (AJL) को कांग्रेस ने 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ का लोन दे दिया. इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है. शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है.