भोपाल. मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने नौ सालों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में नियमों को ताक पर रखकर दलित वर्गों के बच्चों से 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वसूल की है. यह आरोप व्हिसिलब्लोअर ने पूर्व विधायक पारस सखलेचा और अजय दुबे ने लगाया है और व्यापमं से परीक्षार्थियों से वसूल की गई राशि वापस करने के साथ जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है. 
 
150 करोड़ रुपए से ज्यादा की धांधली
सखलेचा और दुबे ने बताया कि व्यापमं की परीक्षा और शुल्क का जो ब्योरा उपलब्ध है वह सिर्फ 2008 से 2013 तक का है, और इस अवधि में ही आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से भर्ती परीक्षाओं में 105 करोड़ रुपये वसूले गए है. अगर बीते नौ सालों में इस राशि को जोड़ा जाएगा तो वह 150 करोड़ से कहीं ज्यादा हेागी.
 
CBI पर उठाए सवाल
उन्होंने सीधे तौर पर व्यापमं की जांच कर रही सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि सीबीआई सिर्फ 157 प्रकरण की ही जांच कर रही है, जबकि एसटीएफ ने 212 प्रकरण दर्ज किए थे. सीबीआई ने जिन 55 प्रकरणों को जांच में नहीं लिया है, उसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है. इतना ही नहीं पिछले दिनों भोपाल में जिन सात रिटायर्ड अफसरों के घरों की तलाशी ली उनके भी नाम बताने से कतरा रही है.
 
दलित वर्गों को किया जा रहा है प्रताड़ित
उन्होने आरोप लगाया कि राज्य में दलित वर्गों के अफसरों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य के 240 अफसरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के लिए लोकायुक्त ने सरकार से अनुमति मांगी, राज्य सरकार ने दो दलित आईएएस अफसर शशि कर्णावत और रमेश थेटे के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की अनुमति दे दी, वह इसलिए क्योंकि वे दलित हैं. वहीं शेष अफसरों के साथ ऐसा करने से कतरा रही है.