नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक आज अपनी मौद्रिक समीक्षा रिपोर्ट जारी करेगा. बीते दिनों आरबीआई गवर्नर ने अपने बयानों में मौद्रिक समीक्षा में कोई बदलाव नहीं होने के साफ़ संकेत दिए थे.

रघुराम राजन के मुताबिक वित्तीय घाटा बढ़ा कर देश की ग्रोथ को बढ़ाना महंगा पड़ सकता है. सिंगापुर के प्रमुख बैंक डीबीएस ने भी यह बात कही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती है रुपये की मजबूती. जब दुनियाभर के बाजार कमजोर थे तब भारत अपनी विदेशी मुद्रा भंडारण को बढ़ा रहा था. डॉलर बेजे जा रहे थे, नए बॉन्ड्स खरीदे जा रहे थे लेकिन जब से रुपये में कमजोरी का दौर आया है भारत की मौद्रिक स्थिति कमजोर हो रही है.

डीबीएस ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपनी रपट के बारे में कहा, बाजार में स्थिरता के बीच हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक दो फरवरी को मुख्य नीतिगत दर यथावत रख सकता है. 2015 के दौरान नीतिगत दर में कुल 1.25 प्रतिशत के बाद रेपो दर 6.75 प्रतिश्त और रिवर्स रेपो दर 5.75 प्रतिशत पर बरकरार रहेगा.

बैंक ने कहा कि नकद आरक्षित अनुपात भी अपरिवर्तित रहने का अनुमान है. अगर 2016-17 का बजट केंद्रीय बैंकों को सरकार की राजकोषीय पुनर्गठन की कोशिश के संबंध आश्वस्त करे तो हमें उम्मीद हैकि मार्च या अप्रैल में 0.25 प्रतिशत की कटौती होगी. मुद्रास्फीति जनवरी 2016 के लक्ष्य के दायरे में है लेकिन इसमें बढ़ोतरी का जोखिम है क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति 2015 की तीसरी तिमाही से बढ़ रही है.