नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद की अंतरिम जमानत 18 मार्च तक के लिए बढ़ा दी है. यह अंतरिम जमानत इन दोनों लोगों को अपनी स्वंयसेवी संस्था सबरंग ट्रस्ट के लिए मिले फंड के दुरुपयोग के मामले में मिली है.
 
गुजरात के 2002 के दंगे में जला दी गई गुलबर्गा सोसाइटी में संग्रहालय बनाने में इस धन को लगाया जाना था. तीस्ता और जावेद को गिरफ्तारी से राहत देते हुए न्यायमूर्ति अनिल आर.दवे, न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला और न्यायमूर्ति वी. गोपाला गौड़ा ने इन दोनों लोगों से सीबीआई को सभी संबंधित दस्तावेज देने को कहा. इनमें फोर्ड फाउंडेशन से सबरंग कम्युनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड को मिले कोष के यूटिलिटी सर्टिफिकेट भी शामिल हैं.
 
कोर्ट ने सीबीआई द्वारा 11 अप्रैल 2015 को मांगे गए दस्तावेजों को सौंपने के लिए तीस्ता को दो हफ्ते का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी. तीस्ता और जावेद को शीर्ष अदालत ने 19 फरवरी को अंतरिम जमानत देते हुए गुजरात पुलिस को इन्हें इस मामले में गिरफ्तार करने से रोक दिया था. 
 
तीस्ता और जावेद ने फंड दुरुपयोग के इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा उन्हें अंतरिम जमानत नहीं देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है.
 
सैर-सपाटे में उड़ाया था फंड का पैसा
तीस्ता पर 2002 के गुजरात दंगा पीड़ितों के राहत फंड के बेजा इस्तेमाल का आरोप है. इसके मुताबिक पीड़ितों के हक में लड़ाई लड़ने और जरूरतमंदों की मदद के लिए विदेशों से आए फंड को उन्होंने शराब और सैर-सपाटे में उड़ा दिया था. धोखाधड़ी के इन मामलों की जांच गुजरात पुलिस और सीबीआई साझे तौर पर कर रहे हैं.
 
तीस्ता के मुताबिक, वह अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसायटी कांड में मारे गए लोगों के लिए इंसाफ मांग रही हैं. गुलबर्ग सोसाइटी में हुए दंगों में कुल 69 लोग मारे गए थे. इनमें कांग्रेस के पूर्व एमपी एहसान जाफरी भी शामिल थे.