नई दिल्ली. दिल्ली के कानून मंत्री जीतेन्द्र सिंह तोमर की डिग्री पर सवाल उठ रहे हैं . आरोप है की जीतेन्द्र सिंह तोमर के पास जो ग्रेजुएशन और वकालत की डिग्री है वो फर्ज़ी है. इस मामले को लेकर विपक्षी पार्टियां लगातार अरविन्द केजरीवाल सरकार को घेर रहीं हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले पर अब तक जो दस्तावेज़ सामने आए हैं वो भी जीतेन्द्र सिंह तोमर की मुश्किल बढ़ाने वाले ही हैं.
  
एबीपी न्यूज ने जीतेन्द्र सिंह तोमर की अब तक हुई पढ़ाई से जुड़े सभी दस्तावेज़ो तक पहुंचने की कोशिश की, उसके मुताबिक जीतेन्द्र सिंह तोमर का जन्म 12 अप्रैल साल 1962 में हुआ था. जीतेन्द्र सिंह तोमर से अपनी दसवीं तक की पढ़ाई दिल्ली के गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल से और ग्यारहवीं बाहरवीं की पढ़ाई गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल अशोक विहार से की. इसके बाद तोमर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में 1985 से 1988 बैच में दाखिला लिया लेकिन वहां से ग्रेजुएशन की डिग्री लिए बिना ही पढ़ाई छोड़ दी.
 
जीतेन्द्र सिंह तोमर का दावा है की इस दौरान उन्होंने फैज़ाबाद के राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया और साल 1986 से 1988 के बीच 2 साल में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली, लेकिन तोमर के इस दावे पर सवाल खड़ा करता है यूजीसी का दस्तावेज़ जो यूजीसी ने साल 1985 में जारी किया था इस दस्तावेज़ के मुताबिक़ साल 1986 के बाद से कोई कॉलेज दो साल में ग्रेजुएशन डिग्री दे ही नहीं सकता, ऐसे में सवाल यह है की आखिर जीतेन्द्र सिंह तोमर ने 2 साल में ग्रेजुएशन की डिग्री कैसे ले ली. और जब इस बारे में जब फैज़ाबाद के राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा गया तो उनका जवाब था की जीतेन्द्र सिंह तोमर की वो डिग्री पूरी तरह फर्ज़ी है. फैज़ाबाद की राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी ने यह जवाब बार कॉउंसिल ऑफ़ दिल्ली के सवाल के जवाब में दिया है.
 
जीतेन्द्र सिंह तोमर ने इसके बाद साल 1994 से लेकर साल 1999 तक बिहार के तिलखा मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी के वीएनएस इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से वकालत की डिग्री लेने की बात कही है. तोमर के मुताबिक़ उन्होंने इस डिग्री के लिए साल 1994 में दाखिल लिया और साल 1999 में पढ़ाई पूरी की हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान तिलखा मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया की जीतेन्द्र सिंह तोमर जिस डिग्री की बात कर रहे हैं वह उनके नाम से जारी ही नहीं की गयी लिहाज़ा वो डिग्री फर्ज़ी है और धोखाधड़ी से तैयार की गयी है. 
 
इतना ही नहीं जीतेन्द्र सिंह तोमर ने साल 2010 में बार कॉउंसिल ऑफ दिल्ली में वकील के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया और जब उनसे पुछा गया तो उन्होंने राम मनोहर लोहिया विश्विद्यालय से ग्रेजुएशन और तिलखा मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी से वकालत की बात कही लेकिन जब उनसे वकालत की डिग्री मांगी गयी तो उन्होंने वह भी नहीं दी.
 
ऐसे में सवाल यह उठता है की अगर इतने सारे दस्तावेज़ जीतेन्द्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्ज़ी करार दे रहे हैं तो सवाल उठेंगे ही.  हालांकि जीतेन्द्र सिंह तोमर का कहना है की उनकी डिग्री फर्ज़ी नहीं है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की उनकी डिग्री को फर्ज़ी करार देने वाले इतने सारे दस्तावेज़ों को वह कैसे फर्ज़ी ठहराते हैं और पाक -साफ राजनीति का दावा करने वाले अरविन्द केजरीवाल सरकार के ये मंत्री कैसे खुद को पाक साफ साबित कर पाते हैं.